न्यायमूर्ति नाथ ने कहा, कुत्तों के काटने से बच्चों या बुजुर्गों की मृत्यु या चोट के हर मामले के लिए हम राज्य सरकारों से भारी मुआवजा देने की मांग करेंगे क्योंकि उन्होंने पिछले पांच वर्षों में नियमों के कार्यान्वयन के संबंध में कुछ नहीं किया है। साथ ही, इन आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वालों की भी जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की जाएगी। अगर आपको इन जानवरों से इतना प्यार है तो आप उन्हें अपने घर क्यों नहीं ले जाते। ये कुत्ते इधर-उधर क्यों घूमते हैं, लोगों को काटते हैं और डराते हैं।
सुप्रीम कोर्ट सात नवंबर, 2025 के अपने उस आदेश में संशोधन के अनुरोध वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें अधिकारियों को सार्वजनिक स्थानों और सड़कों से इन आवारा जानवरों को हटाने का निर्देश दिया गया था। न्यायालय ने कहा कि सबसे अजीब बात यह है कि गुजरात के एक वकील को एक पार्क में कुत्ते ने काट लिया और जब नगर निगम के अधिकारी उस जानवर को पकड़ने गए, तो खुद को कुत्ता प्रेमी बताने वाले वकीलों ने नगर निगम के अधिकारियों पर हमला कर दिया।
शीर्ष अदालत ने यह भी खेद जताया कि पिछले चार दिनों से वह इस मुद्दे पर दलीलें सुन रही है, लेकिन कार्यकर्ताओं और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के हस्तक्षेप के कारण वह मामलों में आगे नहीं बढ़ पाई और केंद्र तथा राज्य सरकारों के पक्ष को भी नहीं सुन सकी।
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा, हम सभी वकीलों से अनुरोध करते हैं कि वे हमें केंद्र, राज्य सरकारों और अन्य संबंधित निकायों की जवाबदेही तय करने दें… हमें आदेश पारित करने दें। हमें राज्यों और केंद्र के साथ आधा दिन बिताने की जरूरत है, ताकि यह देखा जा सके कि उनके पास कोई कार्ययोजना है या नहीं। समस्या हजार गुना बढ़ चुकी है। हम सिर्फ वैधानिक प्रावधानों के क्रियान्वयन की मांग कर रहे हैं। हमें यह करने दें। हमें काम करने दें। हमें आगे बढ़ने दें। (एजेंसी इनपुट के साथ)















