न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन वी अंजारिया की पीठ ने राज्यों के जवाबों की समीक्षा करते हुए यह सख्त टिप्पणी की। कोर्ट विशेष रूप से झारखंड के हलफनामे से हैरान था, जिसमें दावा किया गया था कि पिछले दो महीनों में लगभग 1.9 लाख कुत्तों का टीकाकरण और नसबंदी की गई। पीठ ने कहा कि झारखंड सरकार के पास मौजूद संसाधन और कर्मचारी इतने कम समय में इतने बड़े पैमाने पर कुत्तों की नसबंदी नहीं कर सकते।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 7 नवंबर को आदेश जारी किया था। इसके बाद झारखंड सरकार ने ABC नियमों को लागू करने के लिए कदम उठाए। इसी के तहत उन्होंने ‘1.89 लाख कुत्तों’ की नसबंदी का दावा किया। इसकी तुलना में दिल्ली जैसे राज्य एक साल में लगभग एक लाख कुत्तों की नसबंदी करते हैं। पीठ ने कहा, ‘यह सब फर्जी आंकड़े हैं… सभी राज्य अस्पष्ट बयान देते हैं। यह आंखों में धूल झोंकने जैसा है। उन्हें ठीक से फटकार लगाई जाएगी।’
- एमिकस क्यूरी (न्यायालय के सहायक) वरिष्ठ वकील गौरव अग्रवाल ने राज्यों की ओर से दाखिल किए गए हलफनामों की जांच के बाद कोर्ट को उनकी कमियों के बारे में बताया।
- कोर्ट को यह भी पता चला कि असम में 2024 में 1.66 लाख कुत्तों के काटने के मामले सामने आए, जबकि राज्य में केवल एक ही डॉग सेंटर है। कोर्ट ने कहा, ‘यह चौंकाने वाला है। 2024 में 1.66 लाख कुत्ते के काटने के मामले थे। और, 2025 में सिर्फ जनवरी में, 20,900 मामले थे। यह बहुत चिंताजनक है।’
- राज्यों की ओर से दिए गए जवाबों में कई महत्वपूर्ण जानकारी गायब थी। इनमें आवारा कुत्तों की संख्या, डॉग पाउंड (कुत्तों को रखने की जगह), ABC सेंटर और संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के लिए नियुक्त मानव संसाधन जैसे मुद्दे शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया था?
सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर में निर्देश दिया था कि स्कूलों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस स्टैंडों/डिपो और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा था कि इन जगहों पर कुत्तों के काटने की घटनाओं को रोकने के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों के तहत कुत्तों का टीकाकरण और नसबंदी की जानी चाहिए।
यह आदेश इसलिए दिया गया था क्योंकि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनसे होने वाली समस्याओं, जैसे कि कुत्तों के काटने की घटनाएं, को लेकर चिंता जताई गई थी। कोर्ट चाहता है कि राज्य इन नियमों का गंभीरता से पालन करें और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। राज्यों के ढीले रवैये से कोर्ट नाखुश है और अब उनसे कड़े कदम उठाने की उम्मीद कर रहा है।













