एयर इंडिया देश की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन है। पिछले साल एक विमान दुर्घटना में 260 लोगों की मौत के बाद से यह देश के सुरक्षा नियामक की कड़ी निगरानी में है। तब से एयरलाइन ने कई सुरक्षा खामियां बताई हैं और दिसंबर में यह स्वीकार भी किया था कि प्रक्रिया अनुशासन, संचार और अनुपालन संस्कृति में तत्काल सुधार की आवश्यकता है।
Aviation Sector New Trend: तेजी से बढ़ रहे हैं प्लेन के बिजनेस क्लास में सफर करने वाले, तभी तो एयर इंडिया भी कर रही है ऐसा!
एक महीने में चार गुना वृद्धि
यह डॉक्यूमेंट एयरलाइन ने फरवरी में भारतीय सरकार को सौंपा था। इसके अनुसार जनवरी में एयर इंडिया ने प्रति 1000 उड़ानों पर 1.09 तकनीकी घटनाएं दर्ज कीं। यह दिसंबर 2024 के केवल 0.26 के स्तर से चार गुना ज्यादा है। डॉक्यूमेंट में इससे पहले का कोई डेटा नहीं दिया गया है। हालांकि, डॉक्यूमेंट में यह भी कहा गया है कि हाल के महीनों में परिचालन संबंधी घटनाओं में कमी आई है।
डॉक्यूमेंट के मुताबिक, एयर इंडिया ने जनवरी में 17,500 से ज्यादा उड़ानें भरीं और अपनी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों पर 23 तकनीकी घटनाएं दर्ज कीं। इनमें से कम से कम 21 घटनाओं की एयरलाइन द्वारा औपचारिक जांच की गई। एयर इंडिया के डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि उड़ान संचालन, प्रशिक्षण, इंजीनियरिंग गुणवत्ता और प्रक्रियात्मक निगरानी में व्यवस्थित सुधार किए जा रहे हैं ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। डॉक्यूमेंट में ग्लोबल एयरलाइन इंडस्ट्री के मानकों से केवल चुनिंदा तुलनाएं दी गई थीं, जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डेटा पर आधारित नहीं थीं। इसमें एयरलाइन की बजट सहायक कंपनी एयर इंडिया एक्सप्रेस के बारे में कोई जानकारी शामिल नहीं थी।
विमानों के साथ किस तरह की घटनाएं?
- एयर इंडिया के डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि पिछले महीने रिपोर्ट की गई तकनीकी घटनाओं में इंजन स्टॉल की चेतावनी, फ्लाइट कंट्रोल और हाइड्रोलिक्स से संबंधित समस्याएं, और इंजन ऑयल और फ्यूल लीक शामिल थे।
- इसके एयरबस और बोइंग दोनों विमानों पर घटनाएं हुईं, जिनमें महीने में पांच बार फ्यूल या इंजन ऑयल लीक होने की घटनाएं शामिल थीं। दुबई-मुंबई की एक उड़ान में आगमन पर पाया गया कि एक इंजन की तेल की मात्रा कम थी।
- डॉक्यूमेंट के अनुसार एक अन्य घटना में 12 जनवरी को दिल्ली-दुबई की एक उड़ान टेकऑफ के तुरंत बाद वापस लौटने के लिए मजबूर हुई क्योंकि शौचालय और गैली (किचन) में पानी नहीं था।
- जनवरी में रिजेक्टेड टेकऑफ, प्रतिबंधित ऊंचाई पर उड़ान भरना और गलत सेटिंग्स के साथ उड़ान भरना जैसी घटनाएं प्रति 1000 उड़ानों पर 0.26 थीं, जो दिसंबर 2024 के स्तर से दोगुनी से भी ज्यादा थीं।
चुनौतियों का अंबार
टाटा ग्रुप और सिंगापुर एयरलाइंस के स्वामित्व वाली एयर इंडिया अपनी प्रतिष्ठा और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को फिर से बनाने के साथ-साथ पुराने बेड़े को बदलने के लिए संघर्ष कर रही है, जो सप्लाई चेन में देरी से प्रभावित हुआ है। कूटनीतिक तनाव के कारण भारतीय एयरलाइंस कंपनियों के लिए पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का बंद होना भी एयर इंडिया के लिए वित्तीय रूप से हानिकारक रहा है। ऐसे में एयरलाइंस को कुछ लंबी दूरी के मार्गों को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
भारत के नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इस महीने सांसदों को बताया कि जनवरी 2025 से विश्लेषण किए गए 166 एयर इंडिया विमानों में से 82.5% में बार-बार तकनीकी खराबी पाई गई, जबकि बाजार के अग्रणी इंडिगो के लिए यह आंकड़ा 36.5% था। मंत्रालय ने कोई और विवरण नहीं दिया।
एयरलाइन उठा रही सुधार के कदम
एयर इंडिया के पास अभी 191 विमान हैं, लेकिन उन्होंने 500 से ज्यादा नए विमान खरीदने का ऑर्डर दिया है। एयर इंडिया ने अपनी समस्याओं को दूर करने के लिए कई उपाय किए हैं। उन्होंने अपने एयरबस A320 विमानों के लिए नियमित जांच का कार्यक्रम शुरू किया है और अपने सभी बोइंग 777 विमानों के स्टीयरिंग सिस्टम के हाइड्रोलिक होसेस को बदल दिया है। एयर कंडीशनिंग सिस्टम में लीक की जांच के लिए भी एक कार्यक्रम चलाया जा रहा है। एयरलाइन विमानों की विश्वसनीयता बढ़ाने और घटनाओं को कम करने के लिए खास इंजीनियरिंग उपाय कर रही है।













