इंडिगो की मूल कंपनी इंटरग्लोब एविएशन की कुल आय चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में बढ़कर 24,540.6 करोड़ रुपये हो गई जो पिछले वर्ष की इसी तिमाही में 22,992.8 करोड़ रुपये थी। इंडिगो को दिसंबर महीने की शुरुआत में व्यापक स्तर पर परिचालन व्यवधानों का सामना करना पड़ा था। इसके बाद नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने एयरलाइन के शीतकालीन उड़ान कार्यक्रम को 10 फरवरी तक 10 प्रतिशत तक घटा दिया था।
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रिफंड की प्रक्रिया
इस बीच दिल्ली उच्च न्यायालय ने इंडिगो को पिछले साल दिसंबर में बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द होने के कारण प्रभावित यात्रियों को रद्द टिकटों के लिए धन वापसी और मुआवजे के भुगतान के संबंध में एक हलफनामा दाखिल करने को कहा है। कंपनी के वकील ने मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ को बताया कि रद्द की गई उड़ानों के लिए रिफंड की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और नागरिक उड्डयन नियमों के अनुसार उड़ानें रद्द होने पर मुआवजे की भी पेशकश की जा रही है।
वकील ने यह भी कहा कि ‘सबसे बुरी तरह प्रभावित’ उड़ानों के लिए 10,000 रुपये के वाउचर की पेशकश की जा रही है और यात्रियों के लिए मुआवजे का दावा करने के लिए एक वेबसाइट स्थापित की गई है। कोर्ट ने कंपनी को दो हफ्ते के भीतर एक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया। डीजीसीए के मुताबिक 3 से 5 दिसंबर 2025 के बीच 2,507 उड़ानें रद्द की गईं और 1,852 उड़ानों में देरी हुईं। इससे देश भर के हवाई अड्डों पर तीन लाख से अधिक यात्री प्रभावित हुए।
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क्या हुई कार्रवाई?
नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डीजीसीए की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने बताया कि संकट के बाद अधिकारियों द्वारा कई कदम उठाए गए थे। उन्होंने बताया कि एयरलाइन के एक वरिष्ठ उपाध्यक्ष को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश दिया गया और कंपनी पर 22 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। इसके अलावा, बेहतर अनुपालन के लिए 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी मांगी गई और एयरलाइन के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों, जैसे सीईओ और सीओओ को चेतावनी दी गई। मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी को होगी।













