कंपनी का नाम Engine AI है जो बीजिंग इंटरस्टेलर ह्यूमन स्पेसफ्लाइट टेक्नोलॉजी के साथ मिलकर काम कर रही है। आसान भाषा में समझाएं तो अंतरिक्ष में रोबोट को भेजने के लिए दो कंपनियां साथ आई हैं। एक रोबोट बनाती है और दूसरी कमर्शल स्पेस कंपनी है। ये मिलकर ‘ह्यूमनॉइड रोबोट एस्ट्रोनॉट एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम’ शुरू कर रही हैं।
Engine AI के जिस PM01 ह्यूमनॉइड रोबोट को चुना गया है, उसका PM01 JD Joy Inside वर्जन पिछले साल जून में लॉन्च किया गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, यह वर्जन काफी लाइटवेट, फुर्तीला और ओपन था। तब इसकी कीमत 27 हजार डॉलर थी। इसमें लगा ‘जॉय इनसाइड एआई’ सिस्टम, रोबोट को आसानी से कम्युनिकेट करने में सक्षम बनाता है। यह इंसानों के साथ मिलकर काम कर सकता है। अपने रोल को बदल सकता है। अपनी खुद की पर्सनैलिटी बना सकता है। आवाज में भी बदलाव कर सकता है।
अंतरिक्ष में रोबोट से काम करवाना कितना मुश्किल?
EngineAI ने पिछले साल दावा किया था कि उनका PM01 रोबोट ऐसा पहला ह्यूमनॉइड रोबोट है जो सफलतापूर्वक आगे की ओर फ्लिप कर सकता था। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी का कहना है कि अंतरिक्ष में रोबोट से काम करवाना कोई आसान काम नहीं है। रोबोट को स्थिरता बनाए रखनी होगी। खुद फैसले लेने होंगे। धरती पर ये काम किए जा सकते हैं, लेकिन ऐसी जगह जहां गुरुत्वाकर्षण नहीं है। तापमान में बदलाव होता है और रेडिएशन भी अधिक है, वहां रोबोट के सामने तमाम चैलेंज आएंगे।
रोबोट कैसे तैयार होगा अंतरिक्ष के लिए?
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे पहले रोबोट को अंतरिक्ष के अनुकूल ढलने के लिए तैयार किया जाएगा। उसकी क्षमता और मजबूती को बढ़ाने की तैयारी है। कंपनी चाहती है कि ह्यूमनॉइड रोबोट, अंतरिक्ष में अपने काम अकेले करे, उसे किसी मदद की जरूरत ना पड़े।
किन कामों में आएगा इस्तेमाल?
अगर सबकुछ ठीक रहा तो भविष्य में रोबोट को अंतरिक्ष में स्पेस स्टेशन की बाहरी मरम्मत, खतरनाक रास्तों की तलाश, लंबे समय तक निगरानी करने जैसे कामों में लगाया जा सकता है। रोबोट कामयाब रहे, तो इंसानों पर ऐसे मिशनों के दौरान बने रहने वाला खतरा कम हो जाएगा।













