• International
  • ‘इजरायल का पूरा मिडिल ईस्ट’, अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी पर भड़के मुस्लिम देश, OIC ने जताया विरोध

    तेल अवीव: इजरायली में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी की एक टिप्पणी ने मिडिल ईस्ट में हलचल मचा दी है। माइक हकाबी ने कहा कि इजरायल का मिडिल ईस्ट के अधिकांश हिस्से पर हक है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर इजरायल इस इलाके पर कब्जा कर ले तो भी ठीक है। हकाबी की यह


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk फरवरी 22, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    तेल अवीव: इजरायली में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी की एक टिप्पणी ने मिडिल ईस्ट में हलचल मचा दी है। माइक हकाबी ने कहा कि इजरायल का मिडिल ईस्ट के अधिकांश हिस्से पर हक है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर इजरायल इस इलाके पर कब्जा कर ले तो भी ठीक है। हकाबी की यह टिप्पणी अमेरिका के दक्षिणपंथी कार्यकर्ता और कमेंटेटर टकर कार्लसन के साथ एक इंटरव्यू के दौरान आई, जिसमें उन्होंने कहा कि बाइबल के अनुसार इजरायल को मध्य पूर्व के हिस्सों पर कब्जा करने का अधिकार है। हकाबी की इस टिप्पणी का मुस्लिम देशों ने कड़ा विरोध किया है।

    अमेरिकी राजदूत ने क्या कहा?

    शुक्रवार को प्रसारित हुए इंटरव्यू में कार्लसन ने कहा कि बाइबिल के अनुसार, अब्राहम के वंशजों को वह जमीन मिलेगी, जिसमें आज पूरा मिडिल ईस्ट शामिल होगा। इसके बाद उन्होंने हकाबी से पूछा कि क्या इजरायल का उस जमीन पर हक है। इस पर हकाबी ने जवाब देते हुए कहा, ‘अगर वे सब कुछ ले लें तो भी ठीक रहेगा। हालांकि, हकाबी ने यह भी कहा कि इजरायल अपने इलाके को बढ़ाना नहीं चाहता है। और उसे उस जमीन पर सुरक्षा का हक है जिस पर उसका कानूनी तौर पर कब्जा है।’

    हकाबी की टिप्पणी पर भड़के मुस्लिम देश

    हकाबी की इस टिप्पणी पर इजरायल के पड़ोसी देशों मिस्र, जॉर्डन, सऊदी अरब और इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और हकाबी के बयान को अतिवादी और भड़काऊ बताया। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने हकाबी की टिप्पणी को कट्टरपंथी बयानबाजी कहा और इसे नामंजूर बताते हुए अमेरिकी विदेश मंत्रालय से अपनी स्थिति साफ करने को कहा।

    मिस्र ने भी हकाबी की टिप्पणी की निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का साफ उल्लंघन बताया। मिस्र के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इजरायल का कब्जे वाले फिलिस्तीन या दूसरी अरब जमीनों पर कोई हक नहीं है। जॉर्डन के विदेश मंत्रालय ने बयान की निंदा करते हुए कहा कि यह राजनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन है और क्षेत्र के देशों की संप्रभुता पर हमला है। OIC ने कहा कि इस बयान को किसी भी तरह से मंजूर नहीं किया जा सकता है।

    कौन हैं माइक हकाबी?

    माइक हकाबी रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े हैं और अमेरिका का अर्कांसस प्रांत के गवर्नर रह चुके हैं। ईसाई धर्म को मानने वाले हकाबी इजरायल के कट्टर समर्थक हैं। वे लंबे समय से इजरायल और फिलिस्तीन के लिए दो देश वाले समाधान का विरोध करते रहे हैं। पिछले साल एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वे ब्रिटिश-नियंत्रित फिलिस्तीन में रहने वाले लोगों के अरब वंशजों को फिलिस्तीनी कहना सही नहीं मानते हैं।

    बुक ऑफ जेनेसिस और अब्राहम का वादा

    ताजा इंटरव्यू में कार्लसन ने हकाबी से ओल्ड टेस्टामेंट की बुक ऑफ जेनेसिस के बारे में बात की और इसकी आयतों के बारे में पूछा। कार्लसन ने कहा कि ‘आपने जेनेसिस 15 का जिक्र किया है, जिसमें ईश्वर ने अब्राहम और उनके वंशजों को नील नदी (मिस्र में) से फरात नदी (सीरिया और इराक में बहने वाली) तक जमीन देने का वादा किया था।’

    कार्लसन ने आगे पूछा कि अगर यह इलाका होगा तो इसमें ‘इजरायल, जॉर्डन, सीरिया, लेबनान और सऊदी अरब व इराक के बड़े हिस्से शामिल होंगे।’ इस पर हकाबी ने जवाब दिया कि ‘मुझे नहीं पता कि हम इतनी दूर जाएंगे। मेरा मतलब है कि यह जमीन का बड़ा टुकड़ा होगा।’ हकाबी का बयान उन कट्टर दक्षिणपंथी इजरायली नेताओं से मिलता-जुलता है, जो अपने बयानों में ग्रेटर इजरायल बनाने का जिक्र किया करते हैं। इनमें नील से लेकर यूफ्रेटस (फरात) नदी तक के इलाके को फिर से हासिल करने की बात की जाती है।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।