आयरन बीम क्या है और कब वजूद में आया
आयरन बीम को इजरायल में हिब्रू भाषा में ईटन की रोशनी कहा जाता है। इसे पहली बार 2014 में सिंगापुर एयरशो में इंटरनेशनल डिफेंस कम्यूनिटी के समक्ष प्रदर्शित किया गया था। यह दुश्मन के हथियारों को लेजर से बेकार कर देता है।
आयरन बीम को किसने बनाया
इजरायल के आयरन बीम को राफायल एडवांस डिफेंस सिस्टम्स ने बनाया है। यह एक ऐसी प्रणाली है, जो एक तरह का एनर्जी वेपन है, जो छोटी दूरी से आने वाले खतरे को ठप कर देता है। ऐसे खतरों को पारंपरिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम पहचान नहीं पाते हैं और लागत में भी काफी महंगे पड़ते हैं।
आयरन बीम कैसे काम करता है
- आयरन बीम हाई पावर फाइबर लेजर से से लैस होता है, जो आने वाले खतरे को निशाना बनाकर पूरी एनर्जी उसी पर फोकस कर देता है। इससे ड्रोन या मोर्टार जैसे खतरों को पता लगाकर लेजर बीम छोड़ता है और उसे पंगु बना देता है।
- यह सिस्टम चंद सेकेंड में ही दुश्मन के हथियार को बेकार बना देता है। आयरन बीम 450 में ऑप्टिक्स और बीम कंट्रोल को और ज्यादा अपग्रेड किया गया है, जिससे यह बेहद मारक माना जाता है।
काली के आने से भारत की बढ़ेगी ताकत
- वहीं, प्रोजेक्ट KALI के आने से भारत की ताकत और बढ़ जाएगी। इस हथियार के इस्तेमाल से अचानक रोशनी की एक किरण निकलेगी और दुश्मन के विमान, टैंक और मिसाइल तुरंत नष्ट हो जाएंगे। यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।
- ऐसा माना जाता है कि भारत ने KALI का सफल परीक्षण कर लिया है। यह भी खबरें हैं कि KALI को IL-76 विमान में रखकर हवाई रक्षा प्रणाली बनाई गई है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
भारत के काली हथियार को समझिए
- 7 अप्रैल 2012 की बात है, सियाचिन ग्लेशियर के पास पाकिस्तान के कब्जे वाले गयारी नाम की एक जगह पर उसके एक सैन्य मुख्यालय पर अचानक बर्फ पिघलने लगी, जिससे भारी हिमस्खलन हो गया।
- 29 मई, 2012 को पाकिस्तान ने यह बताया कि उसके 140 लोग मारे गए हैं, जिसमें 129 सैनिक और 11 नागरिक हैं। पाकिस्तान ने उस वक्त ये कहा कि भारत ने काली परियोजना का परीक्षण किया था, जिस वजह उसके सैनिक मारे गए।
काली हथियार आज तक बना हुआ सीक्रेट
- एयरोस्पेस और रक्षा विश्लेषक रहे गिरीश लिंगन्ना ने एक आर्टिकल में बताया था कि भारत के इसी सीक्रेट हथियार काली से पाकिस्तान डरा रहता है। माना तो ये जाता है कि भारत की KALI परियोजना का इस्तेमाल पहाड़ों की बर्फ को पिघलाने के लिए किया जाता है।
- यह कहा जाता है कि बर्फ से ढंके पहाड़ों पर ‘ऑपरेशन व्हाइटवॉश’ चलाया जाता है, जिससे हिमस्खलन होता है। हालांकि इस विषय पर कोई मजबूत स्रोत नहीं बताया गया है, जिस वजह से यह आज तक एक राज ही है। यह कितना बन चुका है, इस बारे में भी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।
काली क्या है, इसे किसने बनाया है
- मीडिया रिपोर्ट्स में लिंगन्ना के हवाले से बताया गया है कि KALI भारत का सीक्रेट हथियार है। इसका पूरा नाम किलो एंपियर लीनियर इंजेक्टर (Kilo Ampere Linear Injector यानी KALI) है।
- KALI पावरफुल इलेक्ट्रॉन बीम निकालता है, जो दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को खराब करके ठप कर सकता है। इसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) ने मिलकर बनाया है।
स्टार वॉर जैसा घातक हथियार है काली
- मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, KALI एक लीनियर इलेक्ट्रॉन एक्सीलरेटर है। इसे पार्टिकल एक्सीलरेटर भी कहते हैं। आसान लहजे में कहें तो यह शक्तिशाली इलेक्ट्रॉन बीम (Relativistic Electron Beams-REBs) निकालता है।
- कई चीजें मिलकर इलेक्ट्रॉनों के शक्तिशाली पल्स बनाते है। ये पल्स एक्स-रे या माइक्रोवेव में बदलते हैं। ये हॉलीवुड फिल्मों के स्टार वॉर्स जैसा ही है।
काली आम लेजर बीम से काफी खतरनाक
- काली से निकलने वाले REB लेजर बीम से अलग होते हैं। लेजर बीम लक्ष्य में छेद करके उसे नष्ट कर देते हैं। वहीं, KALI में REB माइक्रोवेव होते हैं, जिनमें बहुत ज्यादा पावर होती है। यह पावर लक्ष्य के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को गलाकर खराब कर देती है।
- ‘काली’ दुश्मन के टैंकों, लड़ाकू विमानों, मिसाइलों और यहां तक कि नौसैनिक जहाजों को भी चंद पलों में कबाड़ का ढेर बना सकता है। अब तक इसके कई वर्जन बन चुके हैं, जिनमें सबसे एडवांस KALI-5000 है, जिससे माना जाता है कि इसके आगे दुश्मन की मिसाइलें बेकार हो सकती हैं।
KALI की ये खतरनाक तरंगे दुश्मन को पिघला दें
- नवभारत टाइम्स की एक खबर के अनुसार, KALI पावरफल REB पल्स निकालता है। ये इलेक्ट्रॉन एक्स-रे या माइक्रोवेव में बदलते हैं। KALI को हाई-पावर माइक्रोवेव गन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
- हाई पावर माइक्रोवेव गन के रूप में KALI बहुत सारे माइक्रोवेव पैदा करेगा। जब 1000 मिलियन गीगावॉट माइक्रोवेव की यह बौछार दुश्मन के मिसाइलों या विमानों पर डाली जाती है, तो यह उनके इलेक्ट्रॉनिक सर्किट और कंप्यूटर चिप को पिघलाकर नष्ट कर सकती है।
- इसका मतलब है कि यह पाकिस्तान के एफ-16 विमानों और बाबर-गजनवी, गौरी और शाहीन मिसाइलों को चुटकियों में पिघलाकर बेकार कर सकता है। यह दुश्मन के कंप्यूटर सिस्टम को पूरी तरह से बेकार कर देगा।













