पिछले साल जब इजरायल ने कतर में आतंकियों के ठिकाने पर हमला किया था उस दौरान इसी मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था। उस दौरान कई दिनों तक मिलिट्री एनालिस्ट इस बात को लेकर हैरान थे कि इजरायल ने मंगलवार को दोहा में एक विला पर हमले में कतर के एडवांस्ड एयर डिफेंस को कैसे बायपास किया। उस समय द वॉल स्ट्रीट जर्नल में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया था कि इजरायली लड़ाकू विमानों ने अपने टारगेट को हिट करने से पहले सऊदी अरब के ऊपर स्पेस में बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं थीं।
दुनिया की सबसे घातक हवा से लॉन्च होने वाली मिसाइल
इजरायल ने कभी सार्वजनिक तौर पर ऐसे हथियारों के बारे में स्वीकार नहीं किया है। लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया है कि उसके पास हवा से लॉन्च की जाने वाली कई तरह की महाविनाशक बैलिस्टिक मिसाइलें हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर इजरायल ने अभी तक कबूल नहीं किया है लेकिन वॉल स्ट्रीट जर्नल के हवाले से उस समय अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि इजरायल ने उस रहस्यमय हथियार को शायद लाल सागर से सऊदी एयरस्पेस के पार लगभग 1,500 किलोमीटर की दूरे से दागा होगा और उसने दोहा में विला पर हमला किया
गोल्डन होराइजन एक अत्यंत घातक क्षमता वाली इजरायली एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (ALBM) है, जिसके बारे में पहली बार अक्टूबर 2024 में अमेरिकी इंटेलिजेंस डॉक्यूमेंट्स के लीक होने के बाद पता चला था। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में इसकी रेंज 2000 किलोमीटर तक बताई गई है। इसकी स्पीड हाइपरसोनिक है यानि मैक-5 से मैक-9 के बीच। ये मिसाइल हाई प्रिसिजन हमला करने के लिए एक एडवांस्ड डुअल इनर्शियल और GPS गाइडेंस सिस्टम का इस्तेमाल करती है। भारत को अगर ये मिसाइल मिलती है तो भारतीय विमान, चीनी PL-15 मिसाइल की रेंज में आए बगैर पाकिस्तान के ज्यादातर हिस्सों में किसी भी टारगेट पर हमला कर सकता है।
हवा से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइल काफी कम
जमीन से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइल अब कई देश बना चुके हैं और एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम उन्हें अब इंटरसेप्ट भी कर लेते हैं। लेकिन हवाई जहाज से लॉन्च की जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें बहुत कम इस्तेमाल होती हैं। माना जाता है कि रूस, चीन और इजरायल ही ऐसे देश हैं, जिनके पास ऐसी मिसाइलें हैं। इजरायल का डिफेंस प्राइज दो बार जीतने वाले और एरो मिसाइल डिफेंस प्रोग्राम के फाउंडिंग हेड उजी रुबिन ने एक इंटरव्यू में कहा था कि “वे किसी भी दिशा से आ सकती हैं और डिफेंस को बहुत मुश्किल बना सकती हैं।”
अमेरिका ने ऐसे ही एक हथियार AGM-183 हाइपरसोनिक मिसाइल का टेस्ट किया था, लेकिन 2025 के डिफेंस बजट से पता चला था कि इस प्रोजेक्ट की फंडिंग खत्म हो गई और इसे असल में कैंसल कर दिया गया। लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों और दूसरे स्ट्राइक सिस्टम के बड़े जखीरे के साथ, वाशिंगटन ने एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक टेक्नोलॉजी में निवेश करने में बहुत कम दिलचस्पी दिखाई है। भारत को अगर वाकई ये मिसाइल मिलती है तो ब्रह्मोस और स्कैल्प के बाद ALBM ऐसी मिसाइल होगी, जिसे पाकिस्तान किसी भी हालत में नहीं रोक सकता है और भारतीय विमान पाकिस्तान की सीमा से 1000 किलोमीटर से दूर रहकर पाकिस्तान में किसी भी टारगेट को तबाह कर सकते हैं।
इजरायल ALBM देने के लिए तैयार हो गया ये एक बहुत अच्छी खबर है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण एक सवाल ये है कि क्या भारत ऐसी क्षमता खुद विकसित कर सकता है, क्या वह अपना खुद का स्वदेशी ALBM बनाएगा और क्या डेवलपमेंट, टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन साइकिल ऑपरेशनल टाइमलाइन के साथ अलाइन कर सकता है।













