हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देशों के बीच सिक्योरिटी कोऑपरेशन पर एक MoU साइन होने की उम्मीद है, लेकिन दोनों देशों के बीच कोई डिफेंस डील साइन नहीं होगी। इसके पीछे की वजह ये है कि द्विपक्षीय रक्षा सहयोग दो बहुत करीबी साथियों के बीच एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और अगले कुछ सालों में इसकी कीमत लगभग 10 अरब डॉलर से ज्यादा होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल दोनों ही देश पीएम मोदी के दौरे पर कुछ भी जानकारी देने से बच रहे हैं लेकिन माना जा रहा है कि इजरायल, भारत के साथ कुछ बहुत एडवांस टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने के लिए तैयार हो गया है।
भारत-इजरायल के बीच एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डील!
एचटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि इजरायल जो बहुत एडवांस टेक्नोलॉजी ट्रांसफर कर सकता है, उनमें बहुत ज्यादा डिमांड वाली हाई-टेक लेजर डिफेंस और दूसरे स्टैंड-ऑफ सिस्टम शामिल हैं। इजरायल से उम्मीद है कि वह सभी डिफेंस टेक्नोलॉजी शेयर करेगा, जो उसने पिछले कुछ सालों में नहीं किया था। इस रक्षा सहयोग की नींव पिछले साल नवंबर में उस वक्त रखी गई थी जब भारत के रक्षा सचिव आरके सिंह ने इजरायल का दौरा किया था। इस दौरान रक्षा सहयोग को अगले स्तर पर ले जाने के लिए दोनों देशों के बीच एक MoU पर साइन किया गया था।
लेजर एयर डिफेंस बहुत ही ज्यादा एडवांस सिस्टम है, जिसे खुद इजरायल ने पिछले साल के अंत में अपनी सेना में शामिल किया है। हालांकि नवभारत टाइम्स के पास अभी पुख्ता जानकारी नहीं है कि क्या इजरायल उसी सिस्टम का टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करेगा, लेकिन कुछ सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि ऐसा हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो ये बहुत बड़ा समझौता होगा। ये ड्रोन स्वार्म से निपटने के लिए बनाया गया एक अचूक हथियार है। ये सिस्टम ड्रोन को मारने के लिए लेजर लाइट निकालता है।
एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस भारत के लिए गेमचेंजर क्यों है?
इजरायल के साथ मिलकर भारत एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस बनाने की संभावना तलाश रहा है। भारत के लिए ये मिशन सुदर्शन की कुंजी है। भारत सरकार की कोशिश तमाम प्रमुख और खतरे वाले शहरों के साथ साथ डिफेंस फैसिलिटी, प्रमुख इमारतों की रक्षा के लिए एयर डिफेंस सिस्टम तैनात करना है। भारत खुद का एयर डिफेंस सिस्टम तैयार कर रहा है। ताकि देश के अंदरूनी इलाके दुश्मन की लंबी दूरी की मिसाइलों से सुरक्षित रहें।
इजरायल ऐसी टेक्नोलॉजी बनाने में माहिर है। उसके पास लंबी दूरी के एरो, मीडियम रेंज के डेविड्स स्लिंग और कम दूरी के आयरन डोम सिस्टम के साथ एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम है। तेल अवीव के पास एक युद्ध में साबित सिस्टम है। उसने पिछले जून में ईरान की तरफ से दागी गई 98 प्रतिशत बैलिस्टिक मिसाइल को इंटरसेप्ट किया था।
इजरायल के लेजर डिफेंस सिस्टम क्यों माना जाता है सबसे खतरनाक?
इजरायली लेजर डिफेंस को आयरन बीम कहा जाता है और ये दुनिया का पहला और सबसे एडवांस सिस्टम है। ये युद्धक्षेत्र की पूरी स्थिति को बदलने की क्षमता रखता है। दिसंबर 2025 में इसे इजरायली डिफेंस फोर्स में शामिल किया गया था।
प्रकाश की स्पीड से टारगेट पर हमला- पारंपरिक मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने में कुछ सेकंड लगते हैं। लेकिन ‘आयरन बीम’ 3 लाख किमी/सेकंड की गति से हमला करता है।
गोला-बारूद का झंझट खत्म- आयरन बीम में गोला बारूद नहीं लगता है, बल्कि ये बिजली से चलने वाला सिस्टम है। जब तक बिजली की सप्लाई जारी है ये सिस्टम दुश्मन के खतरों को खत्म करता रहेगा। ये दुश्मन के सैकड़ों ड्रोन को एक साथ लेजर लाइट से खत्म करता है, इसलिए ड्रोन स्वार्म का खतरा काफी ज्यादा कम हो जाता है।
ऑपरेशनल कीमत काफी ज्यादा कम- पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम दुश्मनों के मिसाइलों, रॉकेट्स को जिस मिसाइल इंटरसेप्टर से गिराते हैं, उनकी कीमत लाखों में होती है। आयरन बीम का खर्च प्रति शॉट सिर्फ 2-3 डॉलर के करीब होगा। जिससे दुश्मन के लिए हमला करने का खर्च काफी ज्यादा बढ़ जाता है।
पिनप्वाइंट सटीकता- आयरन बीम पिन प्वाइंट सटीकता के साथ हमला करता है। इससे यह हवा में ही रॉकेट के इंजन या उसके विस्फोटक वाले हिस्से को जला देता है। इसके अलावा पारंपरिक मिसाइलें मोर्टार के गोलों को नहीं रोक पातीं क्योंकि उनका उड़ान समय बहुत कम होता है। लेकिन आयरन बीम उन्हें भी रोकने में सक्षम हैं।













