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  • इतने अधिक आवेदन तो इंसानों के मामलों में भी नहीं आते, सुप्रीम कोर्ट ने किस केस को लेकर कही ये बात

    नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के मामले में उसके समक्ष दायर किये जा रहे अंतरिम आवेदनों की संख्या पर संज्ञान लिया और कहा कि आमतौर पर इनसानों से जुड़े मामलों में भी इतनी अधिक संख्या में आवेदन नहीं आते हैं। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने


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    By Azad Hind Desk जनवरी 6, 2026
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    नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के मामले में उसके समक्ष दायर किये जा रहे अंतरिम आवेदनों की संख्या पर संज्ञान लिया और कहा कि आमतौर पर इनसानों से जुड़े मामलों में भी इतनी अधिक संख्या में आवेदन नहीं आते हैं। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने ये टिप्पणियां तब कीं जब दो एडवोकेटओं ने उनके समक्ष आवारा कुत्तों का मामला उठाया।

    सभी याचिकाओं पर होगी सुनवाई

    एक एडवोकेट ने बताया कि उन्होंने इस मामले में एक अंतरिम याचिका दायर की है। इस पर जस्टिस मेहता ने टिप्पणी करते हुए कहा, ‘इनसानों से जुड़े मामलों में भी आमतौर पर इतनी अधिक संख्या में याचिकाएं नहीं आतीं। पीठ ने कहा कि आवारा कुत्तों के मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की जाएगी। जब एक अन्य एडवोकेट ने इस मामले में स्थानांतरण याचिका का जिक्र किया, तो शीर्ष न्यायालय ने कहा कि बुधवार को कई याचिकाओं पर सुनवाई होगी और पीठ सभी एडवोकेटओं की बात सुनेगी।

    7 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिया था निर्देश

    जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन वी अंजारी की तीन-जजों वाली विशेष पीठ बुधवार को इस मामले की सुनवाई करेगी। शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों जैसे संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की घटनाओं में ‘चिंताजनक वृद्धि’ को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल सात नवंबर को आवारा कुत्तों को उचित नसबंदी और टीकाकरण के बाद तुरंत निर्धारित आश्रयों में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था।

    सिस्टम की विफलता का जिक्र

    कोर्ट ने यह भी कहा कि इस प्रकार पकड़े गए आवारा कुत्तों को उस स्थान पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा जहां से उन्हें पकड़ा गया था। न्यायालय ने अधिकारियों को राज्य राजमार्गों, राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे से सभी मवेशियों और अन्य आवारा पशुओं को हटाने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि खेल परिसरों सहित संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की घटनाओं की पुनरावृत्ति न केवल प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है, बल्कि इन परिसरों को रोके जा सकने वाले खतरों से सुरक्षित करने में ‘प्रणालीगत विफलता’ को भी उजागर करती है।

    न्यायालय ने आवारा कुत्तों के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए कई निर्देश जारी किए थे। यह न्यायालय राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों के काटने से, विशेष रूप से बच्चों में, रेबीज फैलने की मीडिया रिपोर्ट के संबंध में पिछले साल 28 जुलाई को शुरू किए गए स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही है।

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