पाकिस्तान में अल्पसंख्यक शिया समुदाय के खिलाफ हिंसा का लंबा इतिहास रहा है लेकिन राजधानी इस्लामाबाद को बाकी देश के मुकाबले सुरक्षित समझा जाता रहा है। इस्लामाबाद में बीते साल नवंबर में एक डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में धमाका हुआ था, जिसमें कई मौतें हुई थीं लेकिन शियाओं के खिलाफ इस तरह का हमला करीब 9 साल बाद हुआ है।
आठ साल बाद शिया मस्जिद में हमला
इस्लामाबाद में शियाओं की किसी मस्जिद पर हमला तकरीबन 9 साल बाद हुआ है। इस्लामाबाद में शिया मस्जिद को निशाना बनाने की आखिरी घटना नवंबर 2017 में हुई थी। इसके बाद शुक्रवार, 6 फरवरी को शिया मस्जिद में खून बहाया गया है। इस हमले की जिम्मेदारी अभी किसी गुट ने नहीं ली है। इसका शक इस्लामिक स्टेट जैसे गुटों पर है। ये गुट कट्टर सुन्नी विचारधारा को मानते हैं और शियाओं को निशाना बनाते हैं।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान में सक्रिय गुटों पर रिसर्च करने वाले अब्दुल सईद ने इस धमाके के बाद कहा कि इस्लामाबाद की शिया मस्जिद में बम धमाके की पुष्टि एक सुसाइड अटैक के तौर पर होना चिंताजनक है। इस हमले में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (खुरासान) मुख्य संदिग्ध है। अगर इसके शामिल होने की पुष्टि होती है तो फिर पाकिस्तान में यह ग्रुप शियाओं के खिलाफ हमले तेज कर सकता है।
शियाओं पर सबसे बड़े हमलों में से एक
शिया मस्जिद में शुक्रवार को हुए हमले को पाकिस्तान और खासतौर से राजधानी इस्लामाबाद में शिया मुस्लिमों पर सबसे बड़े हमलों में से एक माना जा रहा है। इस हमले में अब तक 31 लोगों के लोगों के मारे जाने और 170 के घायल होने की पुष्टि हुई है। मरने वालों में कई की लाशें बुरी तरह क्षत-विक्षत हैं, जो हमले की वीभत्सता को दिखाता है।
मस्जिद परिसर में आत्मघाती हमले के चश्मदीदों ने बताया है कि धमाका बेहद जोरदार था। कुछ सेकंड के लिए किसी को कुछ सुनाई नहीं पड़ा क्योंकि धमाके से लोग एकदम से सिहर गए। इसके बाद चारों ओर सिर्फ खून से लथपथ लोग और चीख पुकार की आवाजें थीं। आसपास के लोगों का कहना है कि यह किसी कयामत से कम नहीं था।













