चीन की मदद उत्साहित पाकिस्तान अरब दुनिया में मिलिट्री मौजूदगी बढ़ा रहा है। इस्लामाबाद ने बीते साल सऊदी अरब के साथ डिफेंस डील है।फिलहाल उसकी सूडान के साथ अरबों डॉलर के हथियारो समझौते पर बात चल रही है। पाकिस्तान NATO जैसा इस्लामिक देशों का सैन्य गठबंधन भी चाहता है। इसमें शुरुआती तौर पर पाकिस्तान के साथ तुर्की और सऊदी शामिल होंगे। यह खासतौर से भारत के लिए चिंता का सबब है।
इस्लामिक नाटो का विचार
पाकिस्तान के मंत्री रजा हयात ने हाल ही में रॉयटर्स से एक बातचीत में खुलासा किया कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच सैन्य समझौते पर बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान-सऊदी अरब-तुर्की त्रिपक्षीय समझौते पर पहले से ही काम चल रहा है। हालांकि यह पिछले साल हुए सऊदी-पाकिस्तानी द्विपक्षीय समझौते से अलग है।’
हयात के मुताबिक, पाकिस्तान-सऊदी अरब-तुर्की त्रिपक्षीय समझौते का ड्राफ्ट हमारे पास है। समझौते का ड्राफ्ट सऊदी अरब और तुर्की के पास भी है। तीनों देशों की सरकारें इस पर बीते 10 महीने से विचार-विमर्श कर रहे हैं। इस डील को पूरा करने के लिए तीनों देशों के बीच अंतिम सहमति जल्द हो सकती है।
पाकिस्तान के रक्षा सौदे
पाकिस्तान का सूडान को हथियार और जेट विमानों की सप्लाई का 1.5 अरब डॉलर का सौदा अंतिम चरण में है। इससे अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज से लड़ रही सूडानी सेना को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। इस्लामाबाद की सऊदी अरब के साथ भी 2 अरब डॉलर के लोन को JF-17 फाइटर जेट सौदे में बदलने पर बातचीत हो रही है।
इराक ने भी पाकिस्तान से JF-17 थंडर जेट खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। रक्षा सौदों के मानकों के हिसाब से 1.5 अरब का सूडानी समझौता और 2 अरब का सऊदी समझौता बहुत बड़ा नहीं कहा जा सकता है। हालांकि ये समझौते पाकिस्तानी सैन्य हार्डवेयर की बढ़ती पहुंच और अरब दुनिया में इसके प्रभाव को जरूर दिखाते हैं।
पाकिस्तान की बदलती भूमिका
एनडीटीवी के मुताबिक, पाकिस्तान की अरब जगत में सैन्य भूमिका पारंपरिक रूप से सेनाओं की ट्रेनिंग तक सीमित रही है। ये भूमिका हालिया समय में बदलती हुई दिखी है। मौजूदा बातचीत सफल होती है तो यह पाकिस्तान को कई मामलों में प्रमुख सुरक्षा प्रदाता बना सकता । यह उसे नाजुक संघर्षों में संतुलन बदलने की क्षमता देगा।
पाकिस्तान के पीछे चीन की भूमिका सबसे खास है। JF-17 को पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर बनाया गया है। इन विमानों के दम पर वह कई समझौते कर रहा है। पाकिस्तान के ये विमान अगर शुरुआती तौर पर सफल रहे तो आने वाले वर्षों में एक हथियार प्रदाता के तौर पर उसका कद काफी ज्यादा बढ़ जाएगा।













