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  • ईयू के साथ FTA डील से बढ़ेगी टेक्सटाइल इंडस्ट्री की चमक, भारत की 27 बड़े देशों तक बढ़ी पहुंच

    गिरिराज सिंह भारत के वैश्विक मंच पर पदार्पण को दुनिया अनदेखा नहीं कर सकती। 16वें इंडिया-ईयू समिट में भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) औपचारिक रूप से पूरा हुआ। इस पर कई दशकों से काम हो रहा था। लेकिन, यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत आर्थिक नेतृत्व का नतीजा है।ईयू


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    By Azad Hind Desk फरवरी 23, 2026
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    गिरिराज सिंह

    भारत के वैश्विक मंच पर पदार्पण को दुनिया अनदेखा नहीं कर सकती। 16वें इंडिया-ईयू समिट में भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) औपचारिक रूप से पूरा हुआ। इस पर कई दशकों से काम हो रहा था। लेकिन, यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत आर्थिक नेतृत्व का नतीजा है।
    ईयू विश्व की दूसरी और भारत चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। वैश्विक GDP में दोनों की करीब 25% हिस्सेदारी है। साल 2014 से पहले भारत सिर्फ 19 देशों के साथ व्यापार करता था और अब हमसे व्यापार करने वाले 56 देश हो गए हैं। सिर्फ भारत-ईयू एफटीए से ही 27 बड़े और महत्वपूर्ण बाजारों तक पहुंच खुली है। यह स्पष्ट रूप से परिणाम आधारित और मजबूत शासन का प्रतीक है।
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    टेक्सटाइल निर्यात में आई तेजी

    आज दुनिया का वस्त्र एवं परिधान बाजार 1.1 लाख करोड़ डॉलर से अधिक का है। यह पूरी दुनिया में बढ़ती मांग और तेजी से हो रहे बदलाव को दर्शाता है। विश्व का कुल आयात 2001 के 366.8 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में करीब 800 अरब डॉलर पहुंच गया। इस माहौल में भारत ने भी अपनी स्थिति दमदार बनाई है। भारत का कुल टेक्सटाइल निर्यात करीब 10 अरब डॉलर से बढ़कर आज 40 अरब डॉलर का हो गया।

    देश में भी टेक्सटाइल क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। भारत का घरेलू टेक्सटाइल बाजार 138 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 190 अरब डॉलर का हो गया है। उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग और लोगों की बढ़ती खरीद क्षमता से इसे बल मिला है। सरकार के कई नीतिगत सुधारों और पहलों से मदद मिली है। सरकारी पहलों से उत्पादन व्यवस्था आधुनिक हुई, आपूर्ति व मूल्य श्रृंखला को मजबूती मिली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा की क्षमता बढ़ी।

    बाजारों तक बढ़ी पहुंच

    इस लिहाज से देखें तो भारत-ईयू व्यापार करार ऐतिहासिक है। इससे यूरोपीय संघ के सभी बाजार तक भारत की पहुंच हो गई है, जहां करीब 2 अरब उपभोक्ता हैं और बाजार का कुल आकार करीब 24 ट्रिलियन डॉलर है। इस समझौते के तहत मूल्य के लिहाज से भारत के 99% से अधिक निर्यात को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा करीब 33 अरब डॉलर के सामान पर लगने वाला 10 से 12% टैरिफ भी खत्म हो जाएगा।

    पिछले दो बरसों में हमने GDP, मांग रुझान, जनसंख्या और प्रति व्यक्ति आय जैसे आंकड़ों के आधार पर नई मार्केट डायवर्सिफिकेशन रणनीति बनाई और उसे आगे बढ़ाया। अब इसके नतीजे दिखने लगे हैं। 2025 में वैश्विक चुनौतियों के बाद भी देश के टेक्सटाइल निर्यात ने 100 से ज्यादा देशों में बढ़त हासिल की है। इससे दुनिया में भारत की मौजूदगी मजबूत हुई है। सरकार की रणनीतियों के कारण निर्यात में तेजी आई है। अर्जेंटीना में 77%, पराग्वे में 45% और मिस्र में 30% निर्यात बढ़ा। इसमें बड़ी भूमिका रेडीमेड कपड़ों की रही। मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के विस्तार ने भी योगदान दिया।

    कौशल विकास पर जोर

    बीते 10 बरसों में भारत के उत्पादन तंत्र में 2 करोड़ से अधिक सिलाई मशीन जोड़ी गई। इससे उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ उत्पादकता बेहतर हुई और रोजगार के अवसर भी बढ़े। यह विस्तार भी मजबूत नीतिगत समर्थन से पूरा हो सका। केंद्रीय बजट 2026-27 में भी टेक्सटाइल क्षेत्र को भारत की विकास रणनीति के केंद्र में रखा गया है। इसके तहत मेगा टेक्सटाइल पार्क, इंटीग्रेटेड वैल्यू चेन, टिकाऊ उत्पादन से जुड़ी पहल और समर्थ 2.0 के तहत कौशल विकास पर जोर है।

    इसके अलावा, प्रमुख टेक्सटाइल क्लस्टरों में टेक्सटाइल निर्यात सुविधा केंद्र बनेंगे। इसके जरिये एक ही मंच पर निर्यातकों को बाजार और FTA की जानकारी, नियमों में सहायता और शुरू से अंत तक सभी सुविधाएं मिलेंगी। साल 2030 तक 100 अरब डॉलर के निर्यात लक्ष्य के साथ, भारत की टेक्सटाइल रणनीति तेज रफ्तार और वैश्विक सोच को दिखाती है। भारत-ईयू एफटीए से यह और मजबूत हुआ है। इसके तहत भारत और यूरोपीय संघ के बीच कुल व्यापार और सहयोग को साल 2030 तक 179 अरब डॉलर से बढ़ाकर 350 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है। आज भारत सिर्फ वैश्विक व्यापार का हिस्सा नहीं है, बल्कि उसे दिशा देने वाला देश बन रहा है।

    (लेखक केंद्रीय वस्त्र मंत्री हैं)

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