मालदीव का चागोस द्वीपसमूह पर दावा
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने पूर्व सरकार के उस रुख को पलट दिया है जिसमें मॉरीशस के दावे का समर्थन किया गया था। उन्होंने कहा कि मालदीव अब मॉरीशस की चागोस द्वीपसमूह पर संप्रभुता को मान्यता नहीं देगा और ओवरलैपिंग समुद्री क्षेत्रों को अपने विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में शामिल करेगा। मुइज्जू सरकार का दावा है कि चागोस द्वीप समूह भौगोलिक रूप से मालदीव के अधिक करीब है और ऐतिहासिक रूप से भी मालदीव का इस पर मजबूत अधिकार है। मालदीव ने ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच मई 2025 में हुए उस समझौते का भी विरोध किया है, जिसके तहत ब्रिटेन चागोस की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने पर सहमत हुआ था।
मॉरीशस मालदीव में समुद्री सीमा को लेकर विवाद
28 अप्रैल 2023 को ‘इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी’ (ITLOS) ने दोनों देशों के बीच 95,000 वर्ग किमी के विवादित समुद्री क्षेत्र का बंटवारा किया था, जिसमें मालदीव को 47,232 वर्ग किमी और मॉरीशस को 45,331 वर्ग किमी क्षेत्र मिला था। हालांकि, मालदीव की वर्तमान सरकार ने अब इस समुद्री सीमा निर्धारण को भी चुनौती दी है। हालांकि मालदीव को EEZ का बड़ा हिस्सा मिला, फिर भी सरकार की आलोचना हुई कि उसने समुद्री क्षेत्र छोड़ दिया। उस वक्त मुइज्जू की पार्टी विपक्ष में थी और उसने इस मुद्दे को राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी खूब भुनाया। मुइज्जू ने वादा किया था कि सरकार बनने पर वह इस क्षेत्र पर पिछली सरकार की गलतियों को सुधारेंगे।
मुइज्जू ने अपने भाषण में क्या कहा
अपने हाल के संसद में दिए भाषण में मुइज्जू ने कहा कि उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के भेजे गए पत्र को वापस ले लिया है और दावा किया कि मालदीव के अधिकारों की रक्षा के लिए ऐसा करना जरूरी था। उन्होंने EEZ के विस्तार और समुद्री सीमाओं को परिभाषित करने के लिए एक विशेष कार्यालय बनाने की बात कही। साथ ही उन्होंने यह भी ऐलान किया कि पूर्व राष्ट्रपति सोलिह के निर्णय की जांच के लिए आयोग भी बनाया जाएगा।
मालदीव की नौसेना कर रही गश्त
मोहम्मद मुइज्जू ने कहा है कि मालदीव राष्ट्रीय रक्षा बल (MNDF) को विवादित क्षेत्रों की समुद्री निगरानी का निर्देश दिया गया है। इस बीच मालदीव की नौसेना ने उस क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर अवैध मछली पकड़ने वाले दो जहाजों को रोका। यह माना जाता रहा है कि चागोस और मालदीव के बीच सांस्कृतिक व ऐतिहासिक निकटता है, लेकिन पहले किसी मालदीवियन सरकार ने इस द्वीपसमूह पर संप्रभुता का दावा नहीं किया था।











