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  • ईरान-इजरायल युद्ध से कच्चे तेल में आग लगना तय, भारत के पास क्या है बैकअप प्लान?

    नई दिल्ली: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग तेज हो गई है। ईरान से होर्मुज की खाड़ी को बंद कर दिया है। दुनिया की 20 फीसदी क्रूड सप्लाई यहीं से गुजरती है। इससे कच्चे तेल की कीमत में भारी उछाल आ सकती है। शुक्रवार को यह 73 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। इस तरह


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    By Azad Hind Desk मार्च 1, 2026
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    नई दिल्ली: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग तेज हो गई है। ईरान से होर्मुज की खाड़ी को बंद कर दिया है। दुनिया की 20 फीसदी क्रूड सप्लाई यहीं से गुजरती है। इससे कच्चे तेल की कीमत में भारी उछाल आ सकती है। शुक्रवार को यह 73 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। इस तरह एक महीने में इसकी कीमत में 6 डॉलर प्रति बैरल का इजाफा हुआ है। माना जा रहा है कि अगर यह लड़ाई लंबी खिंचती है तो कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। सवाल है कि भारतीय कंपनियां इस झटके को सहने के लिए कितनी तैयार हैं?

    इजरायली हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। ईरान ने इसका बदला लेने की धमकी दी है। इससे इस लड़ाई के लंबा खिंचने के आसार हैं। ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने इस स्थिति से निपटने के लिए कमर कस ली है। इंडस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि इस बार ईरान में जंग लंबी खिंच सकती है। इसका ऑयल मार्केट पर व्यापक असर होगा और तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है।

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    क्या है बैकअप प्लान?

    हालांकि हाल-फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ने की आशंका नहीं है। पिछले तीन साल से पेट्रोल और डीजल की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है। कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत में हो रहे बदलावों के मुताबिक रिटेल कीमतों में फेरबदल नहीं कर रही हैं। लेकिन क्रूड की कीमत बढ़ने से उनकी रिफाइनिंग मार्जिन कम हो सकता है और देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इससे चालू खाता घाटा बढ़ सकता है और रुपये पर भी दबाव आ सकता है।

    भारत ईरान से तेल का आयात नहीं करता है लेकिन वहां तेल ठिकानों पर हमले से सप्लाई टाइट हो सकती है और कीमतें बढ़ सकती हैं। भारत की एनर्जी सिक्योरिटी में होर्मुज की खाड़ी की सबसे अहम भूमिका है। भारत का 40% कच्चा तेल और 55% एलएनजी इसी रास्ते से आता है। अधिकारियों ने कहा कि रिफाइनरीज इस स्थिति से निपटने के लिए आकस्मिक विकल्पों पर काम कर रही हैं। इनमें सऊदी और यूएई के बंदरगाहों से लोडिंग शामिल हैं। साथ ही खाड़ी से बाहर के देशों को अतिरिक्त ऑर्डर दिया जा सकता है।

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