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  • ईरान की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों का कब्जा, सरकारी टीवी की बिल्डिंग में लगाई आग, खामेनेई के खिलाफ विद्रोह

    तेहरान: ईरान हाल के वर्षों में विरोध प्रदर्शनों की सबसे गंभीर लहर का सामना कर रहा है जो पूरे देश में तेजी से फैल रहे हैं। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाले इस्लामिक शासन के खिलाफ चल रहे इन प्रदर्शनों ने गुरुवार की रात को उग्र रूप ले लिया। निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा


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    By Azad Hind Desk जनवरी 9, 2026
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    तेहरान: ईरान हाल के वर्षों में विरोध प्रदर्शनों की सबसे गंभीर लहर का सामना कर रहा है जो पूरे देश में तेजी से फैल रहे हैं। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाले इस्लामिक शासन के खिलाफ चल रहे इन प्रदर्शनों ने गुरुवार की रात को उग्र रूप ले लिया। निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के अपील के बाद हजारों प्रदर्शनकारी तेहरान और दूसरे शहरों में सड़कों पर उतर गए। ईरान की सड़कों पर आजादी-आजादी और खामेनेई मुर्दाबाद के नारे लगाए जा रहे थे। देखते ही देखते देश के अलग-अलग हिस्सों से हिंसा और आगजनी की घटना सामने आने लगी।

    सरकारी टीवी की इमारत में आग

    प्रदर्शनकारियों ने सरकारी संपत्तियों को आग लगाना शुरू कर दिया है। इस्फहान में ईरान के सरकारी टीवी इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्ट (IRIB) की एक इमारत को आग के हवाले कर दिया। ठीक उसी दौरान दक्षिणी ईरान में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पोर्ट सिटी बंदर अब्बास की सड़कों पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों की भीड़ जमा हो गई।

    ईरान में इंटरनेट शटडाउन

    विरोध प्रदर्शनों के तेज होने के साथ ही राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान वाली सरकार ने ताकत का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। आधी रात से ही देश भर में इंटरनेट शटडाउन लागू कर दिया और इंटरनेशनल टेलीफोन कॉल भी बंद कर दी गई। यह कदम प्रदर्शनों को लेकर इस्लामिक शासन के डर को दिखाता है जो भारी सुरक्षा तैनाती के बावजूद जारी हैं।

    महंगाई के खिलाफ उठी थी आवाज

    प्रदर्शनों की शुरुआत बीते साल के आखिर में 28 दिसम्बर को हुई थी। इसकी शुरुआती वजह महंगाई और गिरती करेंसी के चलते आर्थिक संकट था, जिसने रोजमर्रा की जिंदगी पर बुरा असर डाला था। लेकिन देखते ही देखते ये एक राजनीतिक आंदोलन में बदल गया है। प्रदर्शनकारी अब खुलेआम सत्ता परिवर्तन की मांग कर रहे हैं। ईरान में खामेनेई के शासन को खत्म करके राजशाही को वापस लाने की मांग उठ रही है। कुछ जगहों पर निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के पोस्टर भी देखे गए हैं।

    प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसा

    देश भर के छोटे-बड़े 100 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शनों की खबरें आई हैं। ये प्रदर्शन अलग-अलग इलाकों के साथ ही जातीय समूहों और सामाजिक वर्गों तक फैले हुए हैं। वहीं, मानवाधिकार समूहों ने ईरानी सुरक्षा बलों पर हिंसा करने के आरोप लगाए हैं। नार्वे स्थित एक NGO ने बताया कि गुरुवार रात को भड़के प्रदर्शनों से पहले 45 लोग सुरक्षाबलों की गोली से मारे गए हैं। इनमें 8 नाबालिग हैं। वहीं, 2000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है।

    अधिकार समूहों ने चेतावनी दी है कि ये आंकड़े और भी ज्यादा सीमित हैं क्योंकि खबरों पर रोक लगाई जा रही है। इंटरनेट शटडाउन से संपर्क और भी सीमित हो गया है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरानी अधिकारी प्रदर्शनकारियों को मारते हैं तो अमेरिका बड़ा हमला करेगा।

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