रविवार को बजट पेश होने के बाद भू-रणनीतिकार ब्रह्म चेलानी ने चाबहार पोर्ट पर बात की है। सोशल मीडिया पर अपने एक लंबे पोस्ट में चेलानी ने कहा है कि चाबहार अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया तक पहुंचने के लिए भारत का अकेला रास्ता है, जो पाकिस्तान को बायपास करता है। अगर भारत इस पोर्ट से पीछे हटता है तो जाहिर है कि चीन के लिए जगह खाली हो जाएगी। ऐसे में भारत का ऐसा करना ध्यान खींचता है।
भारत ने रणनीति के तहत नहीं दिया फंड!
चेलानी कहते हैं कि चीन के खतरे को भारत जानता है। ऐसे में 2026-27 के बजट में चाबहार के लिए फंडिंग की कमी रणनीतिक तौर पर पीछे हटने के बजाय एक टैक्टिकल रोक हो सकती है। इसकी वजह अमेरिका की ओर से भारत को 26 अप्रैल तक चाबहार पर ऑपरेशन बंद करने या प्रतिबंधों का सामना करने की डेडलाइन दी गई है।
चेलानी के मुताबिक, ‘भारत पहले ही चाबहार के शाहिद बेहेश्टी टर्मिनल के डेवलपमेंट के लिए अपनी प्रतिबद्धता के तहत 20 मिलियन डॉलर ट्रांसफर कर चुका है। ये फंड पहले से सिस्टम में हैं इसलिए नए बजट आवंटन की तकनीकी रूप से जरूरत नहीं थी। ये भी पता चलता है कि नई दिल्ली चाबहार पर वॉशिंगटन के साथ बीच का रास्ता तलाश रही है।
ट्रंप प्रशासन को साधने की कोशिश
भारत पर बेवजह दबाव बढ़ाते हुए अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने पिछले सितंबर में दिल्ली को 2018 में चाबहार पर दी गई छूट को बिना किसी कारण के वापस ले लिया था। इसके बाद अमेरिका ने भारत को अप्रैल 2026 तक अपने ऑपरेशन बंद करने के लिए छह महीने की अस्थायी छूट दी। भारत का यह कदम ट्रंप प्रशासन को साधने की कोशिश भी हो सकती है।
भारत ने 2026 के केंद्रीय बजट में चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट के लिए कोई आवंटन नहीं किया है। कई सालों से नई दिल्ली ने ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में दक्षिणी तट पर स्थित चाबहार के विकास के लिए सालाना 100 करोड़ रुपये का बजट रखा था। भारत इस बंदरगाह के विकास में प्रमुख भागीदार है। यह अफगानिस्तान, मध्य एशिया और उससे आगे व्यापार और रणनीतिक पहुंच का अहम हिस्सा है।













