ये न्यूक्लियर कॉम्प्लैक्स काफी विवादित रहा है और माना जाता है कि ईरान के कई संवेदनशील न्यूक्लियर कार्यक्रम यहां चलाए जाते हैं। ईरान में इंटरनेट करीब 2 हफ्ते से पूरी तरह बंद है, इसलिए सही जानकारी का मिलना काफी मुश्किल है। संडे गार्जियन ने ओपन सोर्स इंटेलिजेंस मीडिया मॉनिटरिंग सर्विस के हवाले से बताया है कि पत्रकार और ईरानी राजनीतिक विश्लेषक बेहनम घोलिपुर ने पारचिन “मिलिट्री कॉम्प्लेक्स” में एक धमाके की खबर की पुष्टि की है। हालांकि धमाके वजह का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन अमेरिकी हमले की आशंका के बीच अटकलों का दौर शुरू हो चुका है।
ईरान का पारचिन मिलिट्री कॉम्प्लेक्स संवेदनशील क्यों है?
पारचिन फैसिलिटी की कई वर्षों से अंतरराष्ट्रीय निगरानी की जाती रही है। आरोप हैं कि इसी कॉम्प्लैक्स से ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को तेजी से बढ़ाया गया है। पश्चिमी खुफिया एजेंसियों ने बार-बार इस जगह को परमाणु रिसर्च से जुड़े विस्फोटक कंपोनेंट्स के लिए संभावित टेस्टिंग ग्राउंड बताया है। पिछले साल इजरायल ने जब ईरान के परमाणु और मिसाइल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया था, उस वक्त यहां भी इजरायल ने भारी बमों से हमला किया था। पारचिन में कोई भी घटना, चाहे उसकी पुष्टि हो पाए या नहीं, पूरे मिडिल ईस्ट और उसके बाहर डिप्लोमेटिक और सुरक्षा हलकों में तुरंत हलचल मचा देती है।
पारचिन मिलिट्री कॉम्प्लेक्स में यह धमाका ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका ने इस क्षेत्र की पूरी तरह से घेराबंदी कर दी है। कतर, जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर THAAD एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हो चुका है। अमेरिका का यूएसएस अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत स्ट्राइक ग्रुप गाइडेड मिसाइल विध्वंसक पोतों के साथ आ चुका है। आदेश मिलने के साथ ही यहां से ईरान पर हमले शुरू हो जाएंगे। तुर्की के खुफिया एजेंसियों का अनुमान है कि ईरान के सैन्य अधिकारियों, नेताओं को निशाना बनाकर अमेरिकी हमले किए जा सकते हैं। लेकिन ईरान पहले ही साफ कर चुका है कि हमले कि स्थिति में वो एक पूर्ण युद्ध शुरू करेगा। इसीलिए मिडिल ईस्ट में भीषण युद्ध की आशंका तेज हो चुकी है। कई अरब देश, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब शामिल हैं, उन्होंने ईरान पर हमले के लिए अपने एयरस्पेस के इस्तेमाल की इजाजत देने से इनकार कर दिया है।













