ईरान में ये प्रदर्शन 28 दिसंबर से शुरू हुए थे और अब पूरे देश में फैल गए हैं। द न्यूयॉर्क पोस्ट ने वॉल स्ट्रीट जर्नल के हवाले से बताया है कि ट्रंप प्रशासन ईरान पर हमले के लिए शुरुआती योजना पर काम कर रहा है। इसमें ईरान में कई जगहों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले करने का ऑप्शन भी शामिल है। ट्रंप प्रशासन इस बात पर भी विचार कर रहा है कि ईरान में किन-किन जगहों पर हमला किया जाए। भारत और ईरान के बीच व्यापारिक रिश्ते काफी मजबूत हैं। पहले ईरान में विरोध-प्रदर्शन और बाद में अमेरिका का हमला भारत के लिए कुछ मुश्किलें पैदा कर सकता है।
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भारत के लिए ईरान क्यों महत्वपूर्ण
- भारत के लिए ईरान क्षेत्रीय जुड़ाव के कुछ सबसे महत्वपूर्ण रास्तों के केंद्र में है। इसलिए, तेहरान में स्थिरता सीधे तौर पर भारत के रणनीतिक और व्यावसायिक हितों से जुड़ी हुई है।
- भारत ने मध्य एशिया, रूस और यूरोप तक अपनी पहुंच को गहरा करने के लिए कई प्रोजेक्ट में भारी निवेश किया है। ईरान इन प्रोजेक्ट के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट हब का काम करता है।
- इनमें सबसे महत्वपूर्ण है ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित चाबहार बंदरगाह। यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधा रास्ता देता है।
INSTC भी अहम हिस्सा
ईरान में चाबहार बंदरगाह ही नहीं, बल्कि इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) भी भारत की क्षेत्रीय व्यापार रणनीति का एक अहम हिस्सा है। यह एक मल्टी-मॉडल (कई तरह के परिवहन का इस्तेमाल करने वाला) व्यापार नेटवर्क है जो ईरान के जरिए भारत को रूस और यूरोप से जोड़ता है। यह लंबे और महंगे समुद्री रास्तों पर भारत की निर्भरता को कम करता है। ऐसे में चाबहार बंदरगाह और INSTC, दोनों ही प्रोजेक्ट भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
भारत की ईरान में बड़ी तैयारी
- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चाबहार बंदरगाह की क्षमता को 1,00,000 TEUs (ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट्स) से बढ़ाकर 5,00,000 TEUs करने का काम चल रहा है।
- बंदरगाह को ईरानी रेलवे नेटवर्क से जोड़ने के लिए चाबहार और जाहेदान के बीच 700 किलोमीटर ट्रैक बिछाने का काम भी पूरा किया जा रहा है।
- इन दोनों प्रोजेक्ट के साल 2026 के मध्य तक पूरा होने की उम्मीद है।
दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध
वाणिज्य विभाग के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-ईरान द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1.68 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। इसमें भारत ने 1.24 बिलियन डॉलर का निर्यात किया और 0.44 बिलियन डॉलर का आयात किया। ऐसे में भारत के लिए 0.80 बिलियन डॉलर का व्यापार अधिशेष (सरप्लस) रहा।
- हाल के वर्षों में भारत ईरान के 5 सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में से एक रहा है।
- भारत से ईरान को मुख्य निर्यात वस्तुओं में चावल, चाय, चीनी, दवाएं, मानव निर्मित स्टेपल फाइबर, बिजली की मशीनरी और कृत्रिम आभूषण शामिल हैं।
- ईरान से भारत के मुख्य आयात में सूखे मेवे, अकार्बनिक/कार्बनिक रसायन, कांच के बने पदार्थ आदि शामिल हैं।
भारत पर क्या असर?
ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। चाबहार बंदरगाह और INSTC जैसी परियोजनाएं भारत को मध्य एशिया और यूरोप से जोड़ने में अहम भूमिका निभाती हैं। इन परियोजनाओं में भारत ने काफी निवेश किया है। अगर ईरान में अस्थिरता बढ़ती है तो इन परियोजनाओं के संचालन में बाधा आ सकती है। इससे भारत के व्यापार और लॉजिस्टिक्स पर बुरा असर पड़ सकता है। वहीं अगर ईरान पर अमेरिका हमला कर देता है तो भारत के लिए और भी मुश्किल हो सकती है।












