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  • ईरान पर अमेरिका के हमले से पहले इजरायल के दौरे पर पीएम मोदी, क्‍या तेहरान को है सीधा संदेश, समझें

    तेल अवीव/तेहरान/नई दिल्ली: आज से करीब 26 साल पहले 17 जून 1999 को भारतीय वायुसेना के मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने कारगिल युद्ध के दौरान द्रास और बटालिक सेक्टर में पाकिस्तानी घुसपैठियों को निशाना बनाया था। वायुसेना ने इजरायली लाइटनिंग पॉड्स से पाकिस्तानी कैंप और लॉजिस्टिक्स पर निशाना लगाया गया था। लाइटनिंग पॉड्स को इंडियन मिराज


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk फरवरी 25, 2026
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    तेल अवीव/तेहरान/नई दिल्ली: आज से करीब 26 साल पहले 17 जून 1999 को भारतीय वायुसेना के मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने कारगिल युद्ध के दौरान द्रास और बटालिक सेक्टर में पाकिस्तानी घुसपैठियों को निशाना बनाया था। वायुसेना ने इजरायली लाइटनिंग पॉड्स से पाकिस्तानी कैंप और लॉजिस्टिक्स पर निशाना लगाया गया था। लाइटनिंग पॉड्स को इंडियन मिराज पर लगाया गया था ताकि टारगेट को पेंट किया जा सके और फिर लेजर गाइडेड बमों से उस पर हमला किया जा सके। ये हमला गेमचेंजर साबित हुआ और जनरल परवेज मुशर्रफ ने घुटने टेक दिए।

    कारगल के बाद उरी सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट में ऑपरेशन और पिछले साल 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर, भारत ने पाकिस्तानी आतंकी कैंपों को उड़ाने के लिए इजरायली प्रिसिजन गाइडेड मिसाइलों, लोइटरिंग एम्युनिशन और लेजर गाइडेड बमों का इस्तेमाल किया है। कारगिल के बाद से भारतीय सेना ने सर्चर मार्क 11 से लेकर हेरॉन-टीपी तक इजरायली ड्रोन का इस्तेमाल करके दुश्मन के इलाके की निगरानी की है।

    इजरायल और भारत के बीच होगा बड़ा समझौता
    पीएम मोदी आज इजरायल में रहेंगे और इस दौरान दोनों पक्ष एक सिक्योरिटी MoU पर साइन करने जा रहे हैं। भारत और इजरायल के बीच डिफेंस इंडस्ट्री टेक्नोलॉजी शेयर करने पर पूरी गोपनीयता रखते हुए भारत में हथियारों का प्रोडक्शन शुरू करने को लेकर समझौता होगा। दोनों पक्ष ग्लोबल और रीजनल, दोनों लेवल पर इकोनॉमिक कोऑपरेशन को गहरा करते हुए अपनी द्विपक्षीय पार्टनरशिप को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने के लिए तैयार हैं। इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरायल भारत को आयरन डोम और आयरन बीम जैसे एयर डिफेंस सिस्टम के ज्वाइंट प्रोडक्शन पर डील करने वाला है, जो अपने आप में ऐतिहासिक है।

    यानि भारत और इजरायल के बीच एक भरोसे का रिश्ता बना है, जो खाड़ी के एक और दोस्त देश की तरफ बढ़ता है। वो देश है संयुक्त अरब अमीरात। तीनों पार्टनर आतंकवाद पर भी एक ही पेज पर हैं और धर्म को एक पॉलिटिकल टूल के तौर पर इस्तेमाल करने के खिलाफ हैं। यह पॉलिटिकल इस्लाम और मुकाबला करने वाली क्षेत्रीय ताकतों की तरफ से प्रॉक्सी आतंकी संगठनों के इस्तेमाल को लेकर भी है, जैसा ईरान और पाकिस्तान करते हैं। भारत और इजरायल कई मुद्दों पर एक साथ हैं, जैसे UAE के साथ मिलकर इंडिया-मिडिल ईस्ट इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण।

    क्या ईरान को संदेश दे रहा है भारत?
    मोदी का इजरायल दौरा उस वक्त हो रहा है जब ईरान पर अमेरिकी हमले की आशंका काफी ज्यादा बढ़ी है। जबकि पिछले साल दिसंबर से ही भारत और ईरान के बीच के संबंध में भी हल्का सा शायद मनमुटाव देखा जा रहा है। ये तब हुआ जब ईरान ने एक वाणिज्यिक जहाज को पकड़ा, जिसपर करीब 17 भारतीय क्रू मेंबर्स थे। जनवरी के आखिर तक सिर्फ 8 नाविकों को रिहा किया गया था। इसके बाद भारत ने भी अरब सागर में कई ईरानी तेल टैंकरों को पकड़ा है। इसके अलावा ईरान ने पाकिस्तान और सऊदी के गठबंधन में भी जाने की कोशिश की है, जो भारत के लिए एक रेड लाइन है।

    वहीं, भारत में ईरान के राजदूत ने कहा कि तेहरान ने अभी तक ईरान के रणनीतिक चाबहार पोर्ट के भविष्य के लिए अपने प्लान नहीं बताए हैं, जहां भारत एक अहम कमर्शियल पार्टनर है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मोदी के दौरे से तेहरान के साथ नई दिल्ली के रिश्तों पर असर पड़ सकता है, खासकर तब जब भारत ने ईरानी तेल का इंपोर्ट रोक दिया है। सोमवार को भारत ने भी एक एडवाइजरी जारी करते हुए तत्काल ईरान से अपने नागरिकों को निकलने को कहा है। इसीलिए माना जा रहा है कि ईरान जैसे देश जो अपने फायदे के लिए पलटी मारते रहते हैं, उन्हें भारत एक संदेश दे रहा है।

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