जनवरी 1979 में अमेरिका के समर्थक तत्कालनीन शाह मोहम्मद रजा पहलवी को देश में हुए उग्र जनआंदोलन के बाद अपना पद छोड़कर विदेश भागना पड़ा था। ईरान में हुई इस इस्लामिक क्रांति के बाद अयातुल्लाह रुहोल्लाह खामेनेई देश के सर्वोच्च नेता बने। ज्योतिष के दृष्टिकोण से देखें तो वर्ष 1978-79 की ईरान की इस्लामिक क्रांति के समय राहु गोचर में सिंह राशि में चल रहे थे। और केतु कुंभ राशि में। वर्तमान में जब ईरान में फिर से उग्र जनांदोलन हो रहे हैं तो राहु गोचर में कुंभ राशि में है और केतु सिंह राशि में उसी अक्ष पर कुंभ-सिंह राशि को पीड़ित करते हुए संचार कर रहे हैं। कुंभ राशि को धार्मिक मामलों से संबंधित या धर्म स्थानों की राशि कहा जाता है। कुंभ राशि की वर्तमान में पीड़ा और अधिक बढ़ जाएगी जब 23 फरवरी से लेकर 1 अप्रैल तक मंगल इस राशि में राहु से युति कर अंगारक योग बनाएंगे।
ईरान की स्थापना कुंडली में चल रहा है गुरु में राहु की कठिन दशा
ईरान की स्थापना कुंडली 1 अप्रैल 1979, दोपहर तीन बजे तेहरान की है, जिसमे कर्क लग्न उदय हो रहा है। ईरान की कुंडली में भू-संपदा के अष्टम भाव में चतुर्थ और एकादश भाव के स्वामी शुक्र केतु के साथ बैठे हुए हैं, जहाँ धन स्थान से पड़ रही शनि की दृष्टि ईरान को कच्चे तेल (पेट्रोलियम) के उत्पादन के एक अग्रणी राष्ट्र बनती है । ईरान की कुंडली में धन-सम्पदा के दूसरे घर में सिंह राशि में पड़े शनि और राहु पर वर्तमान में केतु गोचर कर रहे हैं जो की भृगु पद्धति के अनुसार बड़े संकट और धन हानि का योग है। इस अशुभ गोचर के प्रभाव से ईरान की अर्थव्यवस्था चौपट हो चुकी है और ईरान की मुद्रा रियाल अंतर्राष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले बुरी तरह गिर चुकी है।
ईरान की स्थापना कुंडली में गुरु की महादशा में राहु की अंतरदशा 10 जून 2025 से 4 नवंबर 2027 तक चल रही है। महादशानाथ गुरु नवम भाव के स्वामी हो कर लग्न में उच्च राशि कर्क में विराजमान हैं,किंतु अंतरदशा नाथ राहु से गुरु 2/12 का अशुभ सम्बन्ध बना कर धन -हानि का योग ईरान की कुंडली में बना रहे हैं । गोचर में महादशा नाथ गुरु मिथुन राशि में हो कर हानि के बाहरवें घर में चल रहे हैं जो कि इस वर्ष जून तक ईरान में सत्ता परिवर्तन करवा सकते हैं। मंगल गोचर में 15 जनवरी से 23 फरवरी तक युद्ध के स्थान सप्तम भाव में मकर राशि में गोचर कर ईरान में अमेरिका के सैन्य हस्तक्षेप से युद्ध के हालत उत्पन्न कर सकते हैं।
रजा पहलवी की हो सकती है ईरान में वापसी
ईरान के आखिरी राजा (शाह) मोहम्मद रज़ा पहलवी की देश से निर्वासन के बाद 1980 में मिस्र के काहिरा में मृत्यु के बाद उनके सबसे बड़े बेटे रज़ा पहलवी अमेरिका चले गए थे। अमेरिका में रजा पहलवी शाह समर्थक गुटों को इकठ्ठा कर अपने वतन ईरान में खामेनेई की सरकार के विरुद्ध होने वाले आंदोलनों को समर्थन देने का कार्य करते हैं। रज़ा पहलवी की जन्म पत्रिका 31 अक्टूबर 1960, सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर तेहरान, ईरान की है जिसमें धनु लग्न उदय हो रहा है । धनु लग्न की कुंडली में लग्न में विराजमान धनेश शनि और लग्नेश गुरु का बड़ा धन योग है।
इस योग को पंचमेश मंगल की सप्तम भाव से दृष्टि बल दे कर एक राज योग बना रही है। किन्तु भाग्य और पिता के नवम भाव में राहु विराजमान हैं और नवमेश सूर्य नीच राशि तुला में हो कर कुछ कमज़ोर हैं । इस योग के प्रभाव से उनको अपने पिता के साथ अपने देश ईरान को छोड़ कर जाना पड़ा। संयोग से जनवरी 1979 में निर्वासन के समय राहु रज़ा पहलवी की जन्म पत्रिका में नवम भाव (पिता) पर गोचर कर रहे थे । अब जबकि ईरान में फिर से एक बड़ी क्रांति होने के आसार हैं तो राहु कुंभ राशि में हैं और केतु उनके नवम भाव में जन्म के राहु पर गोचर कर रहे हैं।
जून 2026 से जून 2027 के समय गुरु के कर्क राशि में गोचर करते हुए रज़ा पहलवी की ईरान में वापसी हो सकती है। सिंहासन के चतुर्थ भाव में बैठे चन्द्रमा की विंशोत्तरी दशा में रज़ा पहलवी ईरान में तख़्तापलट कर अली खामेनेई की सरकार का अंत कर सकते हैं। गोचर में गुरु के कर्क राशि में आने के बाद ईरान में तेल उत्पादन बढ़ेगा और उस पर लगे आर्थिक प्रतिबन्ध भी समाप्त हो सकते हैं। भारत को जून 2026 से जून 2027 के बीच ईरान से सस्ते कच्चे तेल के आयात का लाभ मिलने से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी आ सकती है।














