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  • ईरान से इवैक्यूएशन फ्लाइट टली, 9,000 भारतीयों का सवाल,ओमान-सऊदी-कतर ने ट्रंप से क्या कहा

    नई दिल्ली: ईरान में फंसे भारतीयों को निकाल कर लाने वाली योजना को फिलहाल के लिए विराम दे दिया गया है। शुक्रवार को तेहरान से नई दिल्ली तक चार्टर्ड फ्लाइट चलाने की योजना थी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान के प्रति रुख में आई थोड़ी नरमी की वजह से इस तरह के इवैक्यूएशन


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    By Azad Hind Desk जनवरी 17, 2026
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    नई दिल्ली: ईरान में फंसे भारतीयों को निकाल कर लाने वाली योजना को फिलहाल के लिए विराम दे दिया गया है। शुक्रवार को तेहरान से नई दिल्ली तक चार्टर्ड फ्लाइट चलाने की योजना थी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान के प्रति रुख में आई थोड़ी नरमी की वजह से इस तरह के इवैक्यूएशन प्लान को फिलहाल रोके जाने की जानकारी है। अलबत्ता कुछ भारतीय खुद से ही स्वदेश लौट आए हैं और उनका कहना है कि अब वहां भी स्थिति ठीक होने लगी है।

    भारतीयों को निकालने की योजना तैयार

    ET की एक रिपोर्ट के अनुसार भले ही अभी के लिए ईरान में मौजूद भारतीय को बड़े पैमाने पर निकाले जाने की योजना टाली गई है, लेकिन तेहरान में मौजूद भारतीय दूतावास वहां की स्थिति पर पल-पल की नजर रख रहा है। सूत्रों का कहना है कि अगर हालात बिगड़ते हैं तो इवैक्यूएशन योजना शुरू करने की पूरी तैयारी कर ली गई है।

    ‘अब वहां स्थिति सामान्य हो गई है’

    हालांकि, इस दौरान कुछ भारतीय अपने खर्च पर कमर्शियल फ्लाइट लेकर दिल्ली लौट आए हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई से उन्होंने कहा कि ‘वहां एक-दो हफ्तों से दिक्कतें होने लगी थीं। इंटरनेट बंद होने की वजह से परिवार से भी संपर्क नहीं कर पा रहे थे। आते समय हम अपनी एंबेसी से भी संपर्क नहीं कर पाए, लेकिन अब वहां स्थिति सामान्य हो गई है।’

    ईरान में 9,000 भारतीय नागरिक

    वैसे ईरान में इस वक्त भी लगभग 9,000 भारतीय नागरिक हैं, जिनमें से 3,000 तो स्टूडेंट हैं और उनमें से भी ज्यादातर मेडिकल छात्र हैं। पहली फ्लाइट से इनमें से 300 भारतीयों को नई दिल्ली लाने की तैयारी थी। इस बीच सूत्रों का कहना है कि ईरान की स्थिति को देखते हुए विदेश मंत्रालय ने उन भारतीय को ईरान से निकालने की तैयारी की है, जो भारत लौटने के इच्छुक हैं।

    अरब देशों ने करवाई ट्रंप से डील!

    जानकारी के अनुसार अरब के प्रमुख देश, जैसे कि ओमान, मिस्र, सऊदी अरब और कतर लगातार अमेरिका और तेहरान में बीच-बचाव के लिए बैकचैनल डिप्लोमेसी में लगे हुए हैं। इसी वजह से माना जा रहा है कि ट्रंप ने ईरान पर हमले की अपनी योजना को फिलहाल टाल दिया है। ओमान दो दशकों से तेहरान और वाशिंगटन में चुपचाप मध्यस्थता कर रहा है और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में मदद की है। न्यूज एजेंसी एएफपी से सऊदी अरब के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उसके देश, कतर और ओमान ने कूटनीतिक प्रयास किया है, जिससे ट्रंप संभावित हमला रोकने के लिए तैयार हुए हैं। इससे तेहरान को अपना ‘एक अच्छा इरादा जाहिर करने’ और ‘क्षेत्र में स्थिति बेकाबू होने से बचने’ का मौका मिला है।

    ट्रंप ने ईरान के नेता को कहा थैंक यू!

    खाड़ी के एक और अधिकारी ने जानकारी दी कि ईरान को चेतावनी दी गई कि मध्य-पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर हमला करने से क्षेत्रीय ताकतों के साथ उसके संबंध बिगड़ जाएंगे। वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा कि उन्हें ‘दूसरी ओर के बड़े महत्वपूर्ण सूत्रों’से विश्वास दिलाया गया है कि ईरान प्रदर्शनकारियों को फांसी नहीं देगा। ईरान सरकार के रुख में नरमी के बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर कहा है, ‘मैं इस बात का बहुत सम्मान करता हूं कि कल होने वाली फांसी की सभी सजाएं (जो 800 से अधिक थीं) ईरान के नेतृत्व ने रद्द कर दी हैं। धन्यवाद!’

    रूस ने भी मध्यस्थता में निभाई भूमिका

    यह भी माना जा रहा है कि रूस ने भी इजरायल और ईरान के बीच मध्यस्थता की है, जिसके चलते दोनों ने एक-दूसरे पर हमले की संभावित योजना टाल दी है। बता दें कि ईरान में आर्थिक मुश्किलों को लेकर 28 दिसंबर को विरोध प्रदर्शन शुरू हुए और ये बड़े और हिंसक प्रदर्शनों में बदल गए। इसमें मौजूदा सत्ता के खात्मे की मांग शुरू हो गई और सरकारी कार्रवाई में हजारों लोगों के मारे जाने की रिपोर्ट हैं। बाद में ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के खिलाफ धमकियां देनी शुरू कर दी थी।

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