ईरान में अमेरिका को नुकसान की उम्मीद
जनरल डैन ने ईरान के खिलाफ हमले को बड़ा ऑपरेशन बताया और कहा कि ‘हमें और नुकसान होने की उम्मीद है और हमेशा की तरह हम अमेरिका के नुकसान को कम करने के लिए काम करेंगे।’ बता दें कि इसके पहले कुवैत में अमेरिकी बेस पर ईरान के हमले में अमेरिका के 6 जवान मारे गए थे। 28 फरवरी को अमेरिकी सेना ने भारी ताकत के साथ ईरान पर हमला बोल दिया था। इसमें अमेरिकी सेना के साथ ही इजरायली आर्म्ड फोर्स भी शामिल थी। हमले के पहले ही दिन ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई मारे गए थे, जिसके बाद ईरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं।
अमेरिका का मिलिट्री प्लान
जरनल डैन ने कहा कि हमारे मिलिट्री मकसद साफ हैं: हमारा मिशन खुद को बचाना और बचाव करना है। अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान को अपनी सीमाओं के बाहर ताकत दिखाने से रोकना है और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई के लिए तैयार रहना है। ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान इस टारगेट सेट के खिलाफ महीनों और कुछ मामलों में सालों की प्लानिंग का नतीजा था। इंफ्रास्ट्रक्चर पर सटीक हमले, इंटेलिजेंस, टारगेट इंटीग्रेशन और सभी हिस्सों के बीच तालमेल ने अमेरिका की पहुंच, तैयारी, प्रोफेशनलिज्म को दिखाया। उन्होंने कहा कि यह काम अभी शुरू हुआ है और आगे जारी रहेगा।
अमेरिका का ऑपरेशन एपिक फ्यूरी
- अमेरिका ने 28 फरवरी की सुबह ईरानी समयानुसार 9.45 बजे ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ शुरू किया। यह दिन के उजाले में किया गया हमला था। एक साथ 100 से ज्यादा एयरक्राफ्ट लॉन्च किए गए।
- सबसे पहले समुद्र से अमेरिकी नेवी ने टॉमहॉक्स मिसाइल लॉन्च की, जो ईरानी ईरान दक्षिणी हिस्से में ईरानी नेवी के पास हमले करने लगे।
- जमीन पर सेना ने सटीक हथियार दागे, जो एकदम सही और जानलेवा थे। यह लड़ाई के सभी क्षेत्रों में एक बहुत बड़ा और जबरदस्त हमला था। इसमें पहले 24 घंटों में 1000 से ज्यादा टारगेट पर हमला किया गया।
- रविवार सुबह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई मारे गए। कुछ ही घंटों बाद ईरान के सरकारी मीडिया ने भी मौत की पुष्टि की।













