व्हाइट हाउस ने क्या कहा
व्हाइट हाउस ने बयान जारी कर कहा कि यह ऑर्डर अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए बनाया गया है। ईरान से सीधे या अप्रत्यक्ष तरीके से कोई सामान या सर्विस खरीदने वाले, आयात करने वाले देशों पर अमेरिका अतिरिक्त टैरिफ लगाएगा।
ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश में अमेरिका
व्हाइट हाउस ने कहा कि यह कदम विदेशों में ईरान की हरकतों का सामना करने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है। इसके साथ ही अमेरिकी सरकार ने अपने बयान में ईरान की न्यूक्लियर क्षमता की कोशिश, उसके बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम, आतंकवाद का समर्थन और मिडिल ईस्ट को अस्थिर करने वाली गतिविधियों का भी जिक्र किया।
ईरान को बताया आतंकवाद को स्पॉन्सर करने वाला देश
व्हाइट हाउस ने ईरान को दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवाद को स्पॉन्सर करने वाला देश बताया और कहा कि तेहरान पूरे इलाके में प्रॉक्सी समूह और मिलिशिया को समर्थन करता है। इसमें उनके फोर्स भी शामिल हैं, जिन्होंने अमेरिकियों को मारा और घायल किया है और जो अमेरिकी सैनिकों, साझेदारों और साथियों को टारगेट करते हैं।
अमेरिका ने ईरान को दी नसीहत
अमेरिकी सरकार ने ईरान के अंदरूनी हालात की ओर इशारा करते हुए कहा कि सरकार ने न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम पर देश के संसाधनों को खर्च किया, जबकि देश का इंफ्रास्ट्रक्चर और आबादी संघर्ष कर रही है। व्हाइट हाउस ने ईरान पर अपने देश में गंभीर दमन का आरोप लगाया। इसमें कहा गया है कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों को मारा है, बुनियादी मानवाधिकारों को नकारा है, और सत्ता बनाए रखने के लिए हिंसा का इस्तेमाल किया है।
ईरान से परमाणु समझौता चाहते हैं ट्रंप
अमेरिका ने ईरान पर कट्टरपंथ फैलाने और शांति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए किए जा रहे प्रयासों को कमजोर करने का भी आरोप लगाया है। वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान डील करना चाहता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान, रूस और यूक्रेन पर बातचीत में हुए विकास की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, “आज हमारी रूस और यूक्रेन के बारे में बहुत अच्छी बातचीत हुई। कुछ हो सकता है।” उन्होंने कहा कि ईरान के साथ भी बातचीत आगे बढ़ रही है। इसी तरह, हमारी ईरान पर भी बहुत अच्छी बातचीत हुई। लगता है कि ईरान डील करना चाहता है।
भारत की कैसे बढ़ सकती हैं मुश्किलें
दरअसल, भारत ने चाबहार बंदरगाह को लेकर ईरान के साथ एक बड़ा समझौता किया है। इस समझौते के तहत भारत ने चाबहार बंदरगाह के शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल को विकसित किया है। हालांकि, अब ट्रंप के नए टैरिफ से भारत का यह निवेश खतरे में पड़ सकता है, क्योंकि इस बंदरगाह को खासतौर पर ईरान और इस देश के रास्ते मध्य एशिया, यूरोप तक व्यापार के लिए डिजाइन किया गया है। चाबहार बंदरगाह अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा का प्रमुख प्रवेश द्वार है, जिसे भारत ने रूस के साथ मिलकर बनाया है।













