कॉटन टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन विजय अग्रवाल ने कहा, “जो खरीदार पहले भारत में कुछ ऑर्डर भेजने के बारे में सोच रहे थे, वे अब आना नहीं चाहते। उन्होंने हमें लिखना शुरू कर दिया है, पूछ रहे हैं कि अगर यह 500% टैरिफ लगाया गया तो क्या होगा, कौन गारंटी लेगा।” यह उद्योग पहले से ही दबाव में है। पिछले अगस्त में अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया था। इसके कारण भारी छूट देनी पड़ी, घरेलू ब्रांडों का रुख करना पड़ा और पड़ोसी देशों के रास्ते निर्यात ऑर्डर भेजने पड़े।
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अमेरिका को एक्सपोर्ट
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 37 अरब डॉलर का कपड़ा और परिधान निर्यात किया, जिसमें से 28-30% अमेरिका को गया। जब से अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 50% टैरिफ लगाया है, उद्योग मुश्किल से ही टिक पा रहा है। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री के अनुसार अप्रैल-नवंबर 2025 के दौरान अपैरल एक्सपोर्ट में मामूली 2.28% की वृद्धि हुई जबकि टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में 2.27% की गिरावट आई।
अग्रवाल ने कहा, “अमेरिका के टैरिफ को लेकर स्थिति बहुत अनिश्चित बनी हुई है। लेकिन हमें माल तो बनाना ही पड़ेगा। हमें जोखिम उठाना ही होगा।” कोलकाता की राजलक्ष्मी कॉटन मिल्स में करीब 8,000 लोग काम करते हैं। कंपनी के एमडी रजत जयपुरिया ने कहा, “हमने निर्यात जारी रखने के लिए भारी छूट दी, इस उम्मीद में कि समस्या जल्द ही हल हो जाएगी। हमने अब पतझड़ के मौसम के ऑर्डर के लिए उत्पादन शुरू कर दिया है। हालांकि, 500% टैरिफ प्रभावी रूप से एक प्रतिबंध जैसा होगा। हमें समझ नहीं आ रहा कि अगर अमेरिका को निर्यात बंद हो गया तो कारखाने कैसे चलेंगे।”
पतझड़ के मौसम के लिए, अमेरिकी खरीदार पहले से ही भारतीय निर्यातकों के विकल्प तलाश रहे हैं। उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि तिरुपुर में पहले से ही तनाव के संकेत दिख रहे हैं। भारत का लगभग 90% निटवेअर यहीं से निर्यात होता है।













