सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले की आंतरिक स्तर पर जांच कराई जा रही है और इस प्रक्रिया के दौरान हरदीप पुरी का पक्ष भी विस्तार से दर्ज किया गया। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आई है कि शुरुआती वेरिफिकेशन में हरदीप सिंह पुरी के खिलाफ कोई गलत जानकारी सामने नहीं आई है। शुरुआती वेरिफिकेशन के आधार पर सरकार संतुष्ट है कि मंत्री के खिलाफ कोई आपत्तिजनक या आपराधिक संलिप्तता सामने नहीं आई है।
यह विवाद कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के बाद शुरू हुआ है जिनमें दावा किया गया है कि अमेरिकी न्याय विभाग से जुड़ी फाइलों में पुरी का नाम कई बार आया है, जिनमें निजी बैठकों और ईमेल आदान-प्रदान का जिक्र भी शामिल है। कांग्रेस पार्टी ने पुरी पर 2014 से 2017 के बीच बदनाम अमेरिकी फाइनेंसर जेफरी एपस्टीन के साथ 62 ईमेल का आदान-प्रदान करने का आरोप लगाया है। पार्टी के अनुसार, इस अवधि के दौरान हुई 14 बैठकें भी दर्ज है।
हालांकि, हरदीप पुरी ने इन आरोपों का स्पष्ट खंडन करते हुए इन्हें बेबुनियाद और राजनीतिक साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में उनका नाम 163 बार आने का दावा भ्रामक है। पुरी ने कहा कि आधिकारिक या पेशेवर संदर्भ में एपस्टीन से अधिक से अधिक चार बार मुलाकात हुई होगी। एक दिन पहले ही कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि दुनिया भर में, सार्वजनिक पद पर आसीन जिन लोगों के नाम एपस्टीन फाइल्स में सामने आए हैं, उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा हमारी सरकार को ऐसा नहीं लगता कि जनता के प्रति कोई नैतिक जवाबदेही है।













