अडानी एयरोस्पेस ने ब्राजील में एम्ब्रेयर के साथ इस फाइनल असेंबली लाइन (FAL) के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता भारत के ‘मेक इन इंडिया’ प्रोग्राम के लिए एक बहुत बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। हालांकि दोनों कंपनियों ने इस खबर पर फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है। अभी यह तय नहीं हुआ है कि यह फाइनल असेंबली लाइन कहां बनेगी, इसमें कितना पैसा लगेगा और यह कब तक चालू हो जाएगी। इन सब बातों की जानकारी इसी महीने हैदराबाद में होने वाले एयर शो में एक औपचारिक घोषणा के साथ सामने आने की उम्मीद है।
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विमानों के ऑर्डर पर छूट
एम्ब्रेयर के इस कदम से सरकार को उम्मीद है कि वह उन ग्राहकों को छूट या प्रोत्साहन देगी जो भारत में बनने वाले कमर्शियल एयरक्राफ्ट का ऑर्डर देंगे। सरकार का मानना है कि इससे न केवल भारत में हवाई जहाज बनाने का एक पूरा इकोसिस्टम तैयार होगा, बल्कि इससे एयरबस और बोइंग जैसी बड़ी कंपनियां भी भारत में पूरी असेंबली लाइन लगाने के लिए प्रेरित होंगी। एक अधिकारी ने बताया, “हम कई चीजों पर विचार कर रहे हैं, जिसमें इस FAL से ऑर्डर करने वालों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन भी शामिल है। किसी भी नए प्रोग्राम की तरह, हमारा विचार है कि जैसे-जैसे ऑर्डर बढ़ेंगे, वैसे-वैसे प्रोत्साहन को धीरे-धीरे कम किया जाएगा, जैसे हर 50 ऑर्डर के बाद।”
एम्ब्रेयर के विमानों का पहले से भारत में यूज हो रहा है। कंपनी के लगभग 50 विमान भारत में कमर्शियल, डिफेंस और बिजनेस एविएशन के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं। फिलहाल कमर्शियल एयरलाइन में केवल स्टार एयर ही एम्ब्रेयर के विमानों का इस्तेमाल करती है। नए ऑर्डर देने पर अगले दशक के मध्य तक एयरबस और बोइंग से विमानों की डिलीवरी मिलना मुश्किल है। इस वजह से, भारत में कुछ नए स्टार्टअप्स अपनी उड़ानें शुरू करने के लिए एम्ब्रेयर के विमानों को खरीदने की योजना बना रही हैं।
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क्या होगा फायदा?
एम्ब्रेयर के सीनियर वीपी राउल विलरॉन का कहना है कि भारत 80 से 146 सीटों वाले विमानों की क्षमता के लिए एक बहुत बड़ा बाजार है। कंपनी को विश्वास है कि अगले 20 साल में भारत को ऐसे 500 विमानों की जरूरत होगी। Subha Aviation के एमडी गौतम साहनी का कहना है कि उन्होंने सरकार से ऑपरेटर का परमिट मांगा है। माना जा रहा है कि साहनी एम्ब्रेयर से बातचीत कर रहे हैं।
साहनी ने कहा, “मैं सरकार से मंजूरी का इंतजार कर रहा हूं और इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकता। लेकिन यह सच है कि भारतीय रीजनल एविएशन मार्केट में भारी वृद्धि होने वाली है। इसका कारण टियर II और III शहरों में नए हवाई अड्डों का खुलना और उड़ान योजना पर ध्यान देना है। दिल्ली और मुंबई में दूसरे हवाई अड्डों के बनने से इन दो बड़े शहरी केंद्रों से क्षेत्रीय उड़ानों की कनेक्टिविटी बढ़ेगी।” साहनी की योजना नोएडा के नए हवाई अड्डे को अपना बेस बनाने की है।












