सुप्रीम कोर्ट ने मांगा मामलों का ब्योरा
चीफ जस्टिस की अगुआई वाली बेंच ने पूछा कि कितने मामलों में ट्रायल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल हो चुकी हैं। यह भी बताना होगा कि ट्रायल कोर्ट स्तर पर कितने मामलों का निपटारा हो चुका है और कितने लंबित हैं। चार हफ्ते में यह ब्योरा मांगा गया है। बेंच ने प्रत्येक पीड़िता का संक्षिप्त ब्योरा, उनकी शैक्षणिक योग्यता, रोजगार और वैवाहिक स्थिति, उसे दिया गया या दिया जाने वाला मेडिकल उपचार और उस पर हुए खर्च का ब्योरा देने को भी कहा। कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पीड़ितों के लिए लागू पुनर्वास योजनाओं का ब्योरा देने का भी निर्देश दिया। उन मामलों का ब्योरा भी मांगा गया, जिनमें पीड़ितों को जबरन तेजाब पिलाया गया।
जनहित याचिका की सुनवाई कर रही थी कोर्ट
चीफ जस्टिस ने केंद्र से यह विचार करने को कहा कि कानून में ऐसे बदलाव किए जाएं, जिससे एसिड अटैक के दोषियों को असाधारण सजा दी जा सके। सुप्रीम कोर्ट एक पीड़िता की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कानून के तहत दिव्यांगों की परिभाषा का विस्तार करने की मांग की गई है, ताकि तेजाब हमलों से आंतरिक अंगों को हुए नुकसान में पर्याप्त मुआवजा और अन्य राहत मिल सके।













