ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले महीने तांबे की कीमत 12,000 डॉलर प्रति टन के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गई थी। यह साल 2009 के बाद से इसकी सबसे बड़ी सालाना बढ़ोतरी है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक जिन कंपनियों के सामानों में तांबा और उससे जुड़े पीतल जैसे मटेरियल का बड़ा हिस्सा होता है (जैसे ड्यूरेबल्स, कुकवेयर और बाथवेयर बनाने वाली कंपनियां) वे अपने मुनाफे को बनाए रखने के लिए कीमतें बढ़ाने वाली हैं। कई कंपनियां तांबा आयात और स्थानीय सोर्सिंग दोनों तरीकों से खरीदती हैं। इसलिए, वैश्विक स्तर पर कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर उनकी कुल लागत पर पड़ता है।
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क्या है कंपनियों का कहना?
वंडरशेफ (Wonderchef) के सीईओ और फाउंडर रवि सक्सेना ने बताया, ‘तांबे और एल्युमीनियम की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। इसलिए हम अपने अप्लायंस और कुकवेयर कैटेगरी में 5 से 7% की बढ़ोतरी करेंगे। तांबा हमारे सबसे लोकप्रिय अप्लायंसेज जैसे न्यूट्री-ब्लेंड और हाई-परफॉरमेंस मिक्सर ग्राइंडर के लिए एक बहुत जरूरी मटेरियल है। इन ऊंची कीमतों की वजह से पूरे अप्लायंस इंडस्ट्री में मार्जिन पर दबाव पड़ रहा है।’ उन्होंने कहा कि अप्लायंसेज को चलाने वाले मोटर्स जैसे कुछ अहम कंपोनेंट्स के लिए तांबा अभी भी ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ है।
सोमनी बाथवेयर (Somany Bathware) के हेड श्रीवत्स सोमानी ने बताया, ‘पीतल बाथवेयर इंडस्ट्री के लिए एक अहम मटेरियल है। वित्तीय वर्ष की शुरुआत से पीतल की कीमत 15 से 18% बढ़ गई है और हमारे सप्लायर्स ने अपनी दरें बढ़ा दी हैं। कंपनियां एक हद से ज्यादा ऊंची लागत को बर्दाश्त नहीं कर सकतीं।’ उन्होंने यह भी बताया कि इंडस्ट्री ने वित्तीय वर्ष की पहली दो तिमाहियों में पहले ही लगभग 12% की बढ़ोतरी कर दी है।
एसी कितना होगा महंगा
गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप (Godrej Enterprises Group) के अप्लायंसेज बिजनेस के बिजनेस हेड और ईवीपी कमल नंदी ने कहा, ‘हमारे लिए एसी कैटेगरी की इनपुट कॉस्ट में कुल मिलाकर 8 से 10% की बढ़ोतरी हुई है। फिलहाल, सभी नए उत्पादित एसी की लागत में तांबे के साथ-साथ एनर्जी टेबल चेंज कॉस्ट का भी असर पड़ेगा, जिससे एसी की कीमतों में 7 से 8% की बढ़ोतरी होगी।’
तांबे में क्यों आई तेजी?
गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों ने 11 दिसंबर को एक नोट में कहा था कि पिछले साल तांबे और एल्युमीनियम जैसी औद्योगिक धातुओं की कीमतें इसलिए बढ़ीं क्योंकि ब्याज दरें कम हुईं, डॉलर कमजोर हुआ और चीन की आर्थिक वृद्धि की उम्मीदें बेहतर हुईं। सप्लाई में रुकावटें, नीतिगत बदलाव और एआई पर भारी खर्च ने भी कीमतों को बढ़ाया। उन्होंने अनुमान लगाया है कि साल 2026 की पहली छमाही में लंदन मेटल एक्सचेंज पर तांबे की औसत कीमत 10,710 डॉलर प्रति टन रहेगी।













