संजय दत्त ने यरवडा जेल ने बाहर आने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी थी। इसमें उन्होंने बताया था कि उन्हें सिक्योरिटी कारणों से जेल में अकेले रखा गया था। संजय ने बताया था कि उन्होंने एक साल तक चने की दाल खाई। राजगिरा नाम की एक ऐसी दाल उन्हें खाने को दी जाती थी, जिसे कोई गाय-बकरी भी नहीं खाएगी।
संजय दत्त बोले थे- खाने में कीड़े-मकोड़े होते थे, गधा भी वो खाना न खाए
संजय दत्त ने यह भी खुलासा किया था कि जेल में उन्हें ऐसा खाना दिया जाता था, जिसे कोई गधा भी न खाए। खाने में कीड़े-मकोड़े होते थे, फिर भी संजय दत्त प्रोटीन के चक्कर में वो खाना खा लेते थे। संजय दत्त ने बताया था कि जब वह जेल गए थे, तो उनका वजन 100 किलो था, पर जब बाहर निकले तो 40 किलो वजन रह गया था।
अंग्रेजों जैसा बर्ताव, जेल के सिस्टम पर सवाल उठाए थे
वहीं, संजय दत्त ने एक बार ‘इंडियाटुडे’ से बातचीत में बताया था कि उन्होंने जेल में रहते हुए भारतीय जेलों की व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। संजय ने कहा था कि आज भी अंग्रेजों के जमाने के मैनुअल फॉलो किए जा रहे हैं, और ऐसा लगता है कि जैसे कोई जेलर कैदियों के सिर पर बैठा हो। संजय ने बताया था कि जेल में उन्हें कोई वीआईपी ट्रीटमेंट नहीं दिया गया, बल्कि अन्य आम कैदियों की तुलना में उनके साथ बहुत बुरा बर्ताव किया गया था।
संजय दत्त क्यों गए थे जेल? 2016 में मिली रिहाई
मालूम हो कि 19 अप्रैल 1993 को मुंबई पुलिस को संजय दत्त के घर की तलाशी में एके 56 मिली थी। उन पर गैरकानूनी तरीके से हथियार रखने का आरोप लगा और गिरफ्तार कर लिया गया था। हालांकि, बाद में वह जमानत पर रिहा हो गए थे। लेकिन संजय दत्त की जमानत को 4 मई 1993 को रद्द कर दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया था। फिर साल 2006 में संजय दत्त को आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाया गया और टाडा कोर्ट ने एक्टर को गैरकानूनी तरीके से हथियार रखने के आरोप में 6 साल की सजा सुनाई थी। संजय दत्त की सजा मई 2016 में खत्म होनी थी, पर जेल में उनके अच्छे व्यवहार को देखते हुए उसी साल फरवरी में एक्टर को रिहा कर दिया गया था।














