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  • ऑनलाइन के जरिए आपके पास भी तो नहीं आ रहा घटिया क्वॉलिटी का सामान? स्नैपडील पर लगा ₹5 लाख का जुर्माना

    नई दिल्ली: अगर आप ई-कॉमर्स वेबसाइट के जरिए सामान खरीदते हैं तो आपको सावधान हो जाइए। हो सकता है कि आपको पास घटिया क्वॉलिटी का सामान आ रहा हो। ऐसे ही एक मामले में ई-कॉमर्स वेबसाइट स्नैपडील ( Snapdeal ) पर 5 लाख रुपये की जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (


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    By Azad Hind Desk फरवरी 17, 2026
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    नई दिल्ली: अगर आप ई-कॉमर्स वेबसाइट के जरिए सामान खरीदते हैं तो आपको सावधान हो जाइए। हो सकता है कि आपको पास घटिया क्वॉलिटी का सामान आ रहा हो। ऐसे ही एक मामले में ई-कॉमर्स वेबसाइट स्नैपडील ( Snapdeal ) पर 5 लाख रुपये की जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी ( CCPA ) ने लगाया है। यह जुर्माना इसलिए लगाया गया क्योंकि स्नैपडील ने अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसे खिलौने बेचे जो भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानकों को पूरा नहीं करते थे। यह ग्राहकों के अधिकारों का उल्लंघन था।

    नियामक संस्था CCPA ने कहा कि वे ई-कॉमर्स कंपनियों और विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहे हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि वे ऐसे खिलौने बेच रहे थे जो अनिवार्य ‘खिलौना (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश, 2020’ और BIS मानकों के अनुसार नहीं थे। इसी मामले में CCPA ने स्नैपडील (Ace Vector Limited) पर यह जुर्माना लगाया है। कंपनी पर आरोप है कि उसने अपने प्लेटफॉर्म पर BIS मानकों के अनुरूप न होने वाले खिलौनों की बिक्री की सुविधा देकर अनुचित व्यापार प्रथाओं और भ्रामक विज्ञापनों का सहारा लिया।
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    41,032 रुपये की फीस कमाई

    चीफ कमिश्नर निधि खरे और कमिश्नर अनुपम मिश्रा के नेतृत्व में CCPA ने स्नैपडील के खिलाफ अपना अंतिम आदेश जारी किया। यह जानकारी उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा दी गई एक रिपोर्ट में सामने आई है। नियामक संस्था के अनुसार, स्नैपडील ने इन गैर-मानक खिलौनों की बिक्री से 41,032 रुपये की फीस कमाई थी। यह कमाई केवल दो पहचाने गए विक्रेताओं, स्टेलियन ट्रेडिंग कंपनी और थ्रिफ्टकार्ट के माध्यम से हुई थी।

    खिलौनों में क्या कमियां मिलीं?

    • जांच में यह भी पाया गया कि कई खिलौनों की लिस्टिंग में जरूरी जानकारी का अभाव था। जैसे कि निर्माता का नाम, पता और BIS सर्टिफिकेशन नंबर जैसी महत्वपूर्ण जानकारी नहीं दी गई थी।
    • प्लेटफॉर्म केवल विक्रेताओं की ओर से दिए गए सेल्फ डिक्लेरेशन पर निर्भर था और उसने स्वतंत्र रूप से कोई जांच नहीं की। CCPA ने इसे खतरनाक प्रोडक्ट की लिस्टिंग होने से रोकने के लिए ‘अपर्याप्त’ माना।

    कंपनी ने क्या किया बचाव?

    CCPA ने बताया कि स्नैपडील ने अपना बचाव करते हुए कहा कि वह एक ‘मार्केटप्लेस ई-कॉमर्स एंटिटी’ की तरह काम करता है, ठीक वैसे ही जैसे कोई फिजिकल शॉपिंग मॉल करता है।

    लेकिन CCPA ने इस तुलना को सिरे से खारिज कर दिया। नियामक संस्था ने कहा कि स्नैपडील ‘तूफान सेल’ और ‘डील ऑफ द डे’ जैसी प्लेटफॉर्म-व्यापी प्रचार बिक्री का प्रबंधन करके लेनदेन पर ‘काफी नियंत्रण’ रखता है। साथ ही, वह प्रोडक्ट को ‘बेहतरीन कीमत पर बढ़िया क्वालिटी’ जैसे गुणवत्ता आश्वासन टैग भी देता है। CCPA के अनुसार, जब ये टैग गैर-मानक BIS वाले सामानों पर लगाए जाते हैं, तो यह एक झूठी गारंटी की तरह काम करता है।

    CCPA ने दी चेतावनी

    नियामक संस्था ने कहा कि यह प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी है कि वह सुनिश्चित करे कि लिस्टेड हर प्रोडक्ट सेफ्टी और क्वॉलिटी मानकों को पूरा करता हो, जैसे कि खिलौनों के लिए BIS सर्टिफिकेशन। अगर ग्राहकों तक पहुंचने वाले सामान में कोई कमी या खराबी होती है, तो इसके लिए प्लेटफॉर्म को भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

    अमेजन और फ्लिपकार्ट को भी नोटिस

    CCPA ने पहले ही Amazon, Flipkart और Snapdeal जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ-साथ स्टेलियन ट्रेडिंग कंपनी, इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार स्टोर आदि जैसे विक्रेताओं को नोटिस जारी किए थे। इन सभी पर आरोप था कि वे ऐसे खिलौने बेच रहे थे जो केंद्रीय सरकार द्वारा अनिवार्य किए गए QCO और BIS मानकों का उल्लंघन करते थे।

    फ्लिपकार्ट पर नकली जूते!

    ई-कॉमर्स वेबसाइट पर पहले भी ऐसे कई मामले आए हैं जब पता चला कि वे घटिया क्वॉलिटी या नकली प्रोडक्ट बेच रहे थे। साल 2017 में फ्लिपकार्ट पर भी ऐसा ही मामला सामने आया था। उस समय अमेरिका के लाइफस्टाइल और फुटवेयर ब्रैंड स्केचर्स ने फ्लिपकार्ट और उसके प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने वाले चार वेंडर्स के खिलाफ कथित तौर पर नकली सामान बेचने के लिए केस किया था। कंपनी ने नकली जूतों के 15 हजार पेयर बरामद किए थे, जिन्हें स्केचर्स ब्रैंड का बताकर बेचा जा रहा था।

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