जमात के पीपुल्स मेनिफेस्टो में क्या है
“पीपुल्स मैनिफेस्टो” शीर्षक वाले इस घोषणापत्र में ‘एक सुरक्षित और मानवीय बांग्लादेश’ का नारा दिया गया है। इस घोषणापत्र में 26 प्रायोरिटी एरिया बताए गए हैं, जिनके बारे में पार्टी का कहना है कि अगर वह सत्ता में आती है तो अगले पांच सालों में स्टेट गवर्नेंस को गाइड करेंगे। जमात-ए-इस्लामी के अमीर डॉ. शफीकुर रहमान ने ढाका के एक फाइव-स्टार होटल में एक सेरेमनी में डिप्लोमैट्स, पॉलिटिकल लीडर्स, जर्नलिस्ट्स, बिजनेस रिप्रेजेंटेटिव्स और सिविल सोसाइटी मेंबर्स की मौजूदगी में मैनिफेस्टो जारी किया।
जमात ने जुलाई आंदोलन को बनाया आधार
इसे जारी करते हुए जमात के नेताओं ने कहा कि उनका मैनिफेस्टो जुलाई आंदोलन से प्रभावित है और इसका मकसद बिना भेदभाव वाला, इंसाफ वाला और इंसानियत वाला बांग्लादेश बनाना है। यह चुनावी घोषणापत्र आठ सेक्शन में बंटा हुआ है, जिसमें पहले सेक्शन का टाइटल है “जुलाई मूवमेंट की भावना में एक भेदभाव-मुक्त, मजबूत और मानवीय बांग्लादेश।” इसके पहले पेज पर जुलाई आंदोलन के शहीदों अबू सईद, शरीफ उस्मान बिन हादी और BUET के स्टूडेंट अबरार फहाद की तस्वीरें हैं। जमात ने इन्हें कथित अन्याय और तानाशाही के ख़िलाफ विरोध का प्रतीक बताया है।
जमात के चुनावी घोषणापत्र की प्रमुख बातें
- देश के स्ट्रक्चर में बुनियादी सुधार और पॉलिटिकल सिस्टम में पूरी तरह बदलाव
- एक नेशनल पार्लियामेंट को मज़बूत बनाना और इलेक्टोरल सिस्टम में सुधार
- जवाबदेह, नागरिक-केंद्रित पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन बनाना
- कानून और व्यवस्था में सुधार, भ्रष्टाचार खत्म करना और जस्टिस सिस्टम में सुधार
- सूचना की आजादी और मीडिया की जवाबदेही पक्का करना
- एक मजबूत डेमोक्रेटिक सिस्टम का निर्माण
- एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल हत्याओं के लिए जवाबदेही
- बुनियादी मानवाधिकारों की सुरक्षा का वादा
- सभी के लिए समान नागरिकता के अधिकार
अर्थव्यवस्था, निवेश और रोजगार पर जोर
जमात ने चुनावी घोषणापत्र में एक टिकाऊ, पारदर्शी और बिजनेस-फ्रेंडली अर्थव्यवस्था के लिए अपनी योजना बताई है। जमात-ए-इस्लामी ने कमोडिटी की कीमतों को स्थिर करने, इन्वेस्टर-फ्रेंडली माहौल बनाने और मेरिट के आधार पर भर्ती के जरिए बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने का वादा किया है। छोटे, मध्यम और लघु उद्योंगों के जरिए इंडस्ट्रियल विस्तार, मजदूरों की तनख्वाह में सुधार, मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा और बाहर से आए लोगों की भलाई में मदद करने पर भी जोर दिया गया है।














