अग्रवाल ने कहा, ‘पहले भाषा को सरल बनाया गया। इसके बाद रूल्स और फॉर्म्स में बदलाव किए गए। ये रूल्स और फॉर्म्स इसी फरवरी में नोटिफाई कर दिए जाएंगे। इसमें कई बदलाव है। कई फॉर्म्स को स्मार्ट बनाया है और कई को खत्म किया है। उद्देश्य यह है कि नियमों का पालन करना आसान हो। साथ ही, इनके जरिए जो आंकड़े हमें मिलें, उनका बेहतर उपयोग हो सके।’
ओल्ड टैक्स रिजीम
सीबीडीटी के चेयरमैन ने कहा, ‘ये फॉर्म वित्त वर्ष 2026-27 की इनकम से जुड़े रिटर्न फाइलिंग के लिए होंगे। ITR फॉर्म्स में ज्यादा बदलाव नहीं होंगे, लेकिन 15C, 15CC, फॉर्म 60, 61, 80G, 80 GG, ऑडिट फॉर्म, फॉरेन टैक्स क्रेडिट से जुड़े फॉर्म से लेकर ट्रस्ट्स और एनपीओ से जुड़े फॉर्म्स में बदलाव होंगे। नया कानून लागू होने के साथ FAQ भी जारी किया जाएगा।’
क्या ओल्ड टैक्स रिजीम को खत्म करने की कोई टाइमलाइन है, अग्रवाल को ने कहा, ‘ऐसी कोई योजना नहीं है, लेकिन असेसमेंट ईयर 2025-26 के लिए 88% करदाता न्यू टैक्स रिजीम में आ चुके है। यह पिछले साल से 12% ज्यादा है। इसी तरह ITR4 के 97% आ गए हैं। 60% कॉरपोरेट इनकम पर अब न्यू टैक्स रिजीम के दायरे में दिखने लगी है।’
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विदेशी संपत्ति का मामला
क्या विदेश में संपत्ति की जानकारी 6 महीने के भीतर देने का एक बार के मौके की जो बात बजट में की गई है, वह ब्लैक मनी से जुड़ी है, इस पर अग्रवाल ने कहा, ‘इसके पीछे सोच ऐसे लोगों को मौका देने की है, जिनसे कोई चीज अनजाने में मिस हो गई है। इसीलिए लिमिट 1 करोड़ रुपये यानी 1 लाख डॉलर की इनकम या 5 करोड़ रुपये की संपत्ति जितनी कम रखी गई है। कोई विदेशी बैंक खाते के ब्याज या ESOP की जानकारी देना भूल गया, तो इसमें ब्लैक मनी वाली बात नहीं है, लेकिन ब्लैक मनी वाले एक्ट में यह डिफॉल्ट माना जाता है। ऐसे लोगों को इसमें मौका दिया गया है।’
अग्रवाल ने बताया कि टैक्सपेयर्स को नियमों की पालन करने के लिए जो NUDGE कैंपेन चलाया गया है, उसके चलते पिछले दो वर्षों में करीब 8800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर मिला है। उन्होंने कहा, ‘यह अभियान SAKSHAM के रूप में 7 पहलुओं आधारित है, जिसमें संदेश देने से लेकर समझाने और फिर नियमों का पालन करते हुए टैक्स जमा करने में मदद करने तक की बात शामिल है।













