यूं तो एक्टर्स अपने लिए अच्छे अवसर पाने के लिए एजेंसियों पर डिंपेंड रहते हैं लेकिन करण जौहर ने कहा है कि इस कॉम्पिटिटिव बिजनेस में एक्टर किसी के प्रति वफादार नहीं होते। हाल ही में करण ने सार्थक आहूजा के साथ बातचीत में इस मुद्दे पर बातें कीं। करण ने कहा कि टैलेंट मैनेजमेंट एक थैंकलेस जॉब है क्योंकि सच ये है कि कोई लॉयल नहीं होता।
करण जौहर ने कहा- हर दो साल में लोग एक एजेंसी से दूसरी एजेंसी में जाते रहते हैं
उन्होंने अपने मन में दबी बातों को खुलकर जाहिर करते हुए कहा, ‘हर दो साल में लोग एक एजेंसी से दूसरी एजेंसी में जाते रहते हैं क्योंकि वे इनसिक्योर महसूस करते हैं। इस बिजनेस में कोई वफादार नहीं है, एक्टर बस इधर-उधर भटकते रहते हैं। तो आप अपने जीवन के दो साल किसी टैलेंट पर लगाते हैं और वे अचानक कहीं और चले जाते हैं, फिर उन्हें वहां अच्छा नहीं लगता और वे आपके पास वापस आना चाहते हैं। यह एक दुष्चक्र है।’
करण जौहर बोले- इस बिजनेस में, केवल कलाकारों के साथ जुड़कर पैसा कमाना बहुत मुश्किल
करण ने इसी बातचीत में आगे कहा कि इस बिजनेस में, केवल कलाकारों के साथ जुड़कर पैसा कमाना बहुत मुश्किल है, इसलिए लोग अब इक्विटी इन्वेस्टमेंट की ओर देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई टैलेंट एजेंसियां अपने कलाकारों के साथ इक्विटी पार्टनरशिप कर रही हैं और उन पार्टनरशिप से पैसा कमाने की कोशिश कर रही हैं। कलाकारों पर केवल कमीशन से आपको कुछ नहीं मिलेगा क्योंकि कलाकार कोई नहीं हैं। वे बिल्कुल कोई नहीं हैं, वो किसी के नहीं हैं।’
टैलेंट मैनेजमेंट को लेकर बोले करण जौहर
करण ने कहा कि उन्होंने टैलेंट मैनेजमेंट में इसलिए कदम रखा क्योंकि यह उनके पास स्वाभाविक रूप से आया। उन्होंने कहा कि इस बिजनेस का 90 प्रतिशत हिस्सा लोगों के अहम और असुरक्षाओं को संभालने से जुड़ा है, जो आसान नहीं है। उन्होंने आगे कहा, ‘अगर आप टैलेंट मैनेजमेंट को एक व्यावसायिक अवसर के रूप में देखेंगे, तो कुछ नहीं होगा।’
करण ने कहा- तब तो मैं आईसीयू में पहुंच जाऊंगा
फिल्म मेकर ने कहा, ’31 साल इस बिजनेस में रहने के बाद, मैं सफलता और असफलता के प्रति सहज हो गया हूं क्योंकि मुझे लगता है कि मेरी खुशी और दुख मेरी सफलता और असफलता का परिणाम नहीं हो सकते, क्योंकि तब तो मैं आईसीयू में पहुंच जाऊंगा।’ बता दें कि करण की एजेंसी रोहित सराफ, सारा अली खान, शनाया कपूर, राशा थडानी जैसे कई एक्टर्स को मैनेज करती है।














