कजाकिस्तान ने नहीं किया कश्मीर का जिक्र
मामले से परिचित लोगों ने बताया कि गुरुवार शाम तक कजाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे का जिक्र करते हुए कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया था। कजाकिस्तान के राष्ट्रपति की वेबसाइट पर कश्मीर मुद्दे से संबंधित किसी दस्तावेज का जिक्र नहीं था। कजाकिस्तान की आधिकारिक समाचार एजेंसी ने भी कश्मीर मुद्दे का जिक्र करने वाले किसी दस्तावेज या समाचार लेख का उल्लेख नहीं किया।
टोकायेव ने शरीफ से क्या कहा?
कजाकिस्तान से जारी दस्तावेजों में आर्थिक सहयोग, कनेक्टिविटी पहल और यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए कई वाणिज्यिक समझौतों का जिक्र है। प्रेसिडेंशियल वेबसाइट में बताया गया है कि राष्ट्रपति टोकायव और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रणनीतिक साझेदारी की स्थापना पर एक संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए। टोकायव ने शहबाज शरीफ के साथ अपनी बैठक के दौरान सामान्य शब्दों में संघर्ष क्षेत्रों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लेख किया और इसमें किसी देश का कोई जिक्र नहीं था। पाकिस्तान ने इसे खुद ही कश्मीर से जोड़ दिया।
टोकायेव ने शरीफ से कहा कि ‘हमने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे संघर्षों पर चिंता जताई। कई जरूरी मुद्दों पर हमारे विचार मिलते हैं और हमें यकीन है कि किसी भी झगड़े को बातचीत और कूटनीतिक कोशिशों से ही सुलझाया जाना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों और इंटरनेशनल कानून का लगातार पालन किया जाना चाहिए और उन्हें बिना शर्त प्राथमिकता मिलनी चाहिए। आज के भूराजनीतिक माहौल में मल्टीलेटरल संगठनों के अंदर आपसी सपोर्ट और बातचीत का खास महत्व है।’
प्रेसिडेंशियल वेबसाइट पर कश्मीर का जिक्र नहीं
राष्ट्रपति की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, टोकायेव ने कहा कि हमने ग्लोबल शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए खास कदमों पर भी चर्चा की। इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में मिलकर हिस्सा लेने के लिए सरकारों के बीच मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर किए गए। यह दस्तावेज अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखने में हमारी साझेदारी को बढ़ाने के लिए एक मजबूत नींव रखता है।
कश्मीर पर भारत के साथ कजाकिस्तान
कजाकिस्तान ने भारत-पाकिस्तान विवाद और कश्मीर मुद्दे पर नई दिल्ली के रुख का समर्थन किया है कि यह दो देशों के बीच विवाद है और इसमें किसी तीसरे पक्ष के दखल की गुंजाइश नहीं है। दूसरे मध्य एशियाई देशों का भी यही रुख है, जो सोवियत काल से चला आ रहा है। कजाकिस्तान ने OIC की बैठक में भी कश्मीर मुद्दे पर भारत के रुख का समर्थन किया है।
मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, टोकायेव ने 2025 में इस्लामाबाद की अपनी यात्रा दो बार रद्द की। इसके साथ ही जब से वह राष्ट्रपति बने हैं, तभी से भारत आने के इच्छुक हैं। कजाकिस्तान के राष्ट्रपति को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन समिट के लिए अस्ताना जाएंगे, लेकिन यह दौरा नहीं हो सका। कजाकिस्तान के प्रधानमंत्री इस महीने AI इम्पैक्ट समिट में शामिल होने के लिए भारत आ सकते हैं।
भारत की पूरे मध्य एशिया में अच्छी छवि है और वह आतंकवाद विरोधी कनेक्टिविटी समेत कई क्षेत्रों में साझेदारी को बढ़ाने और अपग्रेड करने की कोशिश कर रहा है। कजाकिस्तान भी उजबेकिस्तान की तरह, ईरान के रास्ते भारत के साथ कनेक्टिविटी का समर्थक रहा है। मध्य एशिया के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को इस क्षेत्र के देशों को लुभाने में लगे पाकिस्तान का मुकाबला करना चाहिए और सेंट्रल एशिया में अपनी मौजूदगी बढ़ानी चाहिए।













