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  • कांग्रेस ने ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के लिए समिति का किया गठन, अजय माकन संभालेंगे कमान

    नई दिल्ली : कांग्रेस ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) आंदोलन को रफ्तार देने के लिए एक समन्वय समिति का गठन किया है। समिति के नेतृत्व की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेता अजय माकन को सौंपी गई है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मनरेगा बचाओ संग्राम के


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    By Azad Hind Desk जनवरी 4, 2026
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    नई दिल्ली : कांग्रेस ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) आंदोलन को रफ्तार देने के लिए एक समन्वय समिति का गठन किया है। समिति के नेतृत्व की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेता अजय माकन को सौंपी गई है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मनरेगा बचाओ संग्राम के लिए 9 सदस्यीय कॉर्डिनेशन कमेटी का गठन किया है। अजय माकन को समिति का संयोजक बनाया गया है। यह समिति मनरेगा बचाओ संग्राम की देखरेख, मार्गदर्शन और निगरानी का काम करेगी। यह समिति तत्काल प्रभाव से अपना काम शुरू करेगी।

    समिति में कौन-कौन

    समिति में अजय माकन के अलावा जयराम रमेश, संदीप दीक्षित, डॉ. उदित राज, प्रियांक खरगे, डी. अनसूया सीताक्का, दीपिका पांडे सिंह, डॉ. सुनील पंवार और मनीष शर्मा को शामिल किया गया है। केसी वेणुगोपाल ने बताया कि सभी फ्रंटल संगठनों के प्रमुख, एआईसीसी ओबीसी, एससी, अल्पसंख्यक, आदिवासी कांग्रेस विभागों और किसान कांग्रेस के अध्यक्ष भी समन्वय समिति के सदस्य होंगे।

    कांग्रेस ने क्यों लिया ये फैसला

    अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने मनरेगा के अधिकार आधारित स्वरूप की रक्षा के लिए देशभर में बड़े जनआंदोलन की घोषणा की है। वेणुगोपाल ने सभी प्रदेश कांग्रेस समितियों (पीसीसी) को पत्र लिखकर ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के राष्ट्रव्यापी शुभारंभ की जानकारी दी है। यह आंदोलन केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित नए विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम के खिलाफ शुरू किया जा रहा है, जिसे कांग्रेस ने ग्रामीण रोजगार और आजीविका पर सीधा हमला बताया है।

    मनरेगा पर मुखर विपक्षी दल

    वेणुगोपाल ने पत्र के जरिए कहा कि वर्ष 2005 में यूपीए सरकार की ओर से लागू किया गया मनरेगा एक अधिकार-आधारित कानून है। यह कानून ग्रामीण परिवार को मजदूरी रोजगार की मांग करने का कानूनी अधिकार देता है। इसके तहत राज्य सरकारों को 15 दिनों के भीतर काम देना अनिवार्य है, अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देना पड़ता है। यही वैधानिक गारंटी मनरेगा की सबसे बड़ी पहचान है।

    इसलिए बनाई ये रणनीति

    कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा ग्रामीण आजीविका की रीढ़ रहा है, जिससे हर साल 5 से 6 करोड़ परिवारों को रोजगार मिलता है। इससे मजबूरी में होने वाला पलायन घटा है, ग्रामीण मजदूरी बढ़ी है और गांवों में टिकाऊ सामुदायिक संपत्तियों का निर्माण हुआ है। इस योजना से महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और वंचित वर्गों को विशेष लाभ मिला है। कुल कार्यदिवसों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत बताई गई है।

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