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  • ‘कांग्रेस बालक बुद्धि पार्टी’, विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव में गलत तारीख होने पर बीजेपी का तंज

    नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान जबरदस्त हंगामा देखने को मिल रहा है। इस बीच मंगलवार को विपक्षी सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। विपक्ष ने स्पीकर पर सदन के कामकाज में पक्षपातपूर्ण व्यवहार करने का आरोप लगाया है। रूल 94(सी) के तहत पेश किए गए अविश्वास


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    By Azad Hind Desk फरवरी 10, 2026
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    नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान जबरदस्त हंगामा देखने को मिल रहा है। इस बीच मंगलवार को विपक्षी सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। विपक्ष ने स्पीकर पर सदन के कामकाज में पक्षपातपूर्ण व्यवहार करने का आरोप लगाया है। रूल 94(सी) के तहत पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव में कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। वहीं बीजेपी ने प्रस्ताव में गलत तारीख को लेकर कांग्रेस व राहुल गांधी पर कटाक्ष किया है।

    बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने मंगलवार पर एक्स पर पोस्ट कर राहुल गांधी पर तंज कसा है। प्रदीप भंडारी ने कहा, ‘पप्पू ब्रिगेड तो ठीक से नोटिस भी जमा नहीं कर पाई।’ उन्होंने नोटिस जारी करते हुए कहा, देखिए नोटिस में साल 2025 लिखा है, जबकि बजट सत्र 2026 में शुरू हुआ था। कांग्रेस सचमुच एक बालक बुद्धि पार्टी है।’

    विपक्ष ने नोटिस में क्या कहा?

    नोटिस में विपक्ष ने स्पीकर पर सदन की कार्यवाही खुलेआम पक्षपातपूर्ण तरीके से चलाने और विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं को बार-बार बोलने का मौका न देने का आरोप लगाया।

    राहुल गांधी को न बोलने देने का आरोप

    अपने आरोप को साबित करने के लिए प्रस्ताव में कई उदाहरणों का हवाला दिया गया। इसमें कहा गया कि 2 फरवरी को राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर अपना संबोधन पूरा नहीं करने दिया गया। 3 फरवरी को आठ विपक्षी सांसदों को बजट सेशन के बाकी समय के लिए मनमाने ढंग से सस्पेंड कर दिया गया, जिसके बारे में नोटिस में दावा किया गया कि यह सदस्यों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए सजा देने जैसा है।

    पत्र में विपक्ष ने 4 फरवरी की एक घटना का भी जिक्र किया, जब विपक्षी सदस्यों के बार-बार कहने के बावजूद, एक भाजपा सांसद को कथित तौर पर चेयर से बिना किसी डांट के दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर पूरी तरह से आपत्तिजनक और निजी हमले करने की इजाजत दी गई थी और संबंधित सांसद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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