इजरायल की भारत मामलों की एक्सपर्ट डॉक्टर लौरेन दागन अमोस ने यरुशलम पोस्ट में लिखे अपने लेख में कहा कि भारत ने अपने साल 2027 के रक्षा बजट में ऐलान किया है कि वह एआई, स्वायत्तता और आत्मनिर्भरता पर दोगुना खर्च करेगा। इस प्रक्रिया में वह इजरायल के साथ अपने रिश्ते को नया रूप देगा। उन्होंने कहा कि भारत ने इस साल 93.5 अरब डॉलर के रक्षा बजट का ऐलान किया है। इसमें भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद के रणनीतिक प्लान को बताया है। लौरेन ने कहा कि यह बजट इजरायल और पश्चिमी देशों के लिए मूलभूत दस्तावेज है।
भारत और इजरायल का क्या है प्लान
इजरायली एक्सपर्ट ने दावा किया कि यह दिखाता है कि अब भारत और इजरायल सप्लायर और कस्टमर के परंपरागत मॉडल से आगे बढ़ रहे हैं और औद्योगिक भागीदारी करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी चाहते हैं कि साल 2026 में भारत केवल हथियार आयातक देश नहीं रहे बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता हासिल करके सिक्यॉरिटी प्रोवाइडर बने जो क्षेत्रीय माहौल को आकार दे। लौरने ने कहा कि भारत के रक्षा बजट को ऑपरेशन सिंदूर से जोड़कर देखा जाना चाहिए। इस ऑपरेशन ने भारत को सटीक हमला करने वाला देश बना दिया।
लौरेन ने कहा कि इस अभियान ने एकीकृत खुफिया निगरानी, हथियारबंद ड्रोन और एआई से लैस जासूसी और निगरानी की ताकत को दिखाया जो दुश्मन को बिना परमाणु युद्ध छेड़े भारी नुकसान पहुंचा सकता है। इस बजट में 26.1 अरब डॉलर हथियार खरीदने के लिए रखे गए हैं जिसका उद्देश्य बड़े हथियारों के साथ अन्य घातक हथियारों को लेना है। भारत अब खासकर एआई, स्वायत्त निगरानी सिस्टम और नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर पर फोकस कर रहा है। भारत अब केवल हथियार नहीं खरीद रहा है बल्कि ‘डिजिटल ब्रेन’ में निवेश कर रहा है ताकि सभी सेनाओं में ऑपरेशनल एकरूपता बनी रहे।
भारत और इजरायल की एक समस्या और एक समाधान
भारत और इजरायल दोनों ही एक ही समस्या से जूझ रहे हैं। दोनों को ही सैनिकों के वेतन और पेंशन पर भारी खर्च करना पड़ रहा है। भारत का करीब आधा रक्षा बजट सैनिकों के वेतन और पेंशन पर खर्च करना पड़ रहा है। भारत इसे कम करने के लिए अब एआई पर फोकस कर रहा है। भारत की कोशिश है कि एआई की मदद से कम सैनिकों में भी ज्यादा सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके। लौरेन ने कहा कि यह इजरायली सेना की ‘स्माल एंड स्मार्ट’ डॉक्ट्रिन से मेल खाता है। उन्होंने कहा कि भारत की कोशिश निगरानी प्रक्रिया, लॉजिस्टिक्स और सीमा प्रबंधन को ऑटोमेट करके इसे हासिल किया जाए।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के काउंटर ड्रोन सिस्टम ने सैकड़ों की तादाद में पाकिस्तानी ड्रोन को तबाह कर दिया था। यह वह क्षेत्र है जहां इजरायल भारत की मदद कर सकता है। इजरायली कंपनियां भारत को ऐसी युद्ध में सफल तकनीक का ट्रांसफर कर सकती हैं। भारत जल, थल और नभ तीनों ही क्षेत्रों में एआई का यूज करना चाहता है ताकि निगरानी को मजबूत किया जा सके। इसमें इजरायल की एआई तकनीक मदद कर सकती है। पीएम मोदी की यात्रा के दौरान एआई तकनीक पर बात हो सकती है। इजरायली एआई तकनीक को भारतीय हथियारों में लगाया जा सकता है। कारगिल युद्ध के समय इजरायल ने भारत को ऐसे बम दिए थे जो लेजर तकनीक से लैस थे और उन्होंने पाकिस्तानी सैनिकों के ठिकानों को तबाह कर दिया था। इससे पाकिस्तानी सेना को भारतीय इलाके को छोड़कर जाना पड़ा था। इन विमानों को मिराज फाइटर जेट की मदद से गिराया गया था।













