कियारा आडवाणी ने अपनी शादी के समय की तस्वीरें शेयर की हैं जिसमें वे अपने ससुर और बाकी परिवार के साथ दिख रही हैं। कियारा ने कहा है कि शुरुआत से ही उनके ससुर ने हमेशा खुली बाहों से उनका स्वागत किया और अपनी कहानियों और चुटकुलों से खूब हंसाया।
कियारा ने ससुर के लिए लिखा- बिना किसी स्वार्थ के बड़े प्यार से मेरा स्वागत किया
उन्होंने अपने इस पोस्ट के साथ लंबा-चौड़ा कैप्शन लिखा, ‘शुरुआत से ही आपने खुले हाथों से बिना किसी स्वार्थ के बड़े प्यार से मेरा स्वागत किया, जिसने हम सभी को एक आधार दिया। आपका स्नेह, आपकी उदारता अटूट थी। आप हर समय मौजूद रहते थे, ध्यान से बातों को सुनते थे और छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखते थे। आपने सिर्फ और सिर्फ देना सीखा।
‘ईमानदारी और अटूट प्रेम की विरासत छोड़ गए’
एक्ट्रेस ने अपने पिता समान ससुर से काफी कुछ सीखा है और वही विरासत अपने बच्चे को भी देना चाहती हैं। एक्ट्रेस ने आगे लिखा, ‘आपकी कहानियां, आपकी हंसी, आपका शांत साहस और आपका कोमल हृदय मेरे दिल में हमेशा बसे रहेंगे। आप अपने पीछे कोमलता, ईमानदारी और अटूट प्रेम की विरासत छोड़ गए हैं। यह आपके बच्चों, पोते-पोतियों और हम सभी में जीवित रहेगा जिन्हें आपको जानने का सौभाग्य मिला।’
सिद्धार्थ के माता-पिता से कियारा का गहरा कनेक्शन
साफ है कि कियारा का सिद्धार्थ के माता-पिता से बॉन्ड बेहद प्यारा और गहरा है। शादी के बाद एक्ट्रेस ने खुद खुलासा किया था कि वे अपने सास-ससुर के लिए मुंबई आने पर खास तैयारियां करती थीं। उन्होंने बताया था कि सिद्धार्थ की मां को दिल्ली के गोलगप्पे बहुत पसंद हैं, तो वे वैसे ही दिल्ली वाले स्वाद के साथ घर पर गोलगप्पे बनवाती थीं और खुद भी बनाने में मदद करती थीं।
सुनील मल्होत्रा नेवी में कैप्टन हुआ करते थे
बता दें कि सिद्धार्थ के पिता सुनील मल्होत्रा काफी समय से बीमार चल रहे थे और 4 दिन पहले ही उनका निधन हो गया। सुनील मर्चेंट नेवी में कैप्टन थे और बेटे के फिल्मी करियर में उनका बड़ा योगदान था।
सिद्धार्थ ने पापा के लिए किया इमोसनल पोस्ट
वहीं सिद्धार्थ ने भी पिता के लिए काफी भावुक बातें कही हैं। उन्होंने अपने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, ‘वे असाधारण ईमानदारी, सच्चाई और कल्चर से भरे शख्सियत थे। उन्होंने ऐसे मूल्यों को चुना जिसकी वजह से कभी कहीं झुके नहीं। बिना कठोर हुए अनुशासन का पालन किया। अहंकार के बिना शक्ति। जीवन की तमाम मुश्किलों में भी पॉजिटिव रहते थे। नौसेना में कैप्टन रहे पापा समंदर पर कमांड से लेकर शांत और साहस के साथ बीमारी का सामना करने तक, उन्होंने कभी समझौता नहीं किया, कभी अपना गरिमापूर्ण व्यक्तित्व को नहीं खोया। यहां तक कि जब स्ट्रोक के कारण उन्हें वीलचेयर पर बैठना पड़ा, तब भी उनका हौसला बुलंद रहा।
पापा, आपकी ईमानदारी मेरी विरासत है।
आपकी शक्ति मुझे हर दिन रास्ता दिखाती है।
आपकी पॉजिटिविटी आज भी इस परिवार को एक साथ जोड़े रखती है।’













