आरबीआई ने केसीसी ऋण की स्वीकृति और पुनर्भुगतान कार्यक्रम में एकरूपता लाने के लिए फसल सत्रों की अवधि को मानकीकृत करने का प्रस्ताव भी रखा है। इसके तहत कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों को 12 माह के चक्र और लंबी अवधि वाली फसलों को 18 माह के चक्र के रूप में परिभाषित किया गया है। लंबी अवधि की फसलों के चक्र के अनुरूप ऋण अवधि तय करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड की कुल अवधि छह वर्ष करने का प्रस्ताव रखा गया है।
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क्या होगा फायदा?
मसौदे में केसीसी के तहत निकासी सीमा को प्रत्येक फसल सत्र के लिए फसल की अनुमानित लागत के साथ समायोजित करने का सुझाव दिया गया है, ताकि किसानों को वास्तविक खेती लागत के अनुरूप पर्याप्त ऋण मिल सके। इसके अलावा, मिट्टी की जांच, वास्तविक समय में मौसम पूर्वानुमान और जैविक एवं उत्तम कृषि पद्धतियों के प्रमाणन जैसे तकनीकी खर्चों को भी पात्र मद में शामिल किया गया है। ये खर्च कृषि परिसंपत्तियों के रखरखाव एवं मरम्मत के लिए वर्तमान में स्वीकृत 20 प्रतिशत अतिरिक्त घटक के भीतर रखे जाएंगे।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने फरवरी के मौद्रिक नीतिगत वक्तव्य में केसीसी से संबंधित इन संशोधनों की घोषणा की थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को पेश बजट में किसानों के लिए कई घोषणाएं की थी। उन्होंने कहा था कि किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये की जाएगी। अब तक की व्यवस्था के मुताबिक किसान क्रेडिट कार्ड के तहत 3 लाख रुपये तक के फसली ऋण के लिए 7% ब्याज दर है। समय पर भुगतान करने पर 3% की सब्सिडी मिलने से प्रभावी दर 4% रह जाती है।
(भाषा से इनपुट के साथ)













