शादी के झूठे वादे पर रेप के केस का सामना कर रहे एक शख्स की बेल पिटीशन पर सुनवाई करते हुए, जस्टिस बी वी नागरत्ना और उज्जल भुइयां ने सवाल उठाए कि जिस महिला की बात हो रही है, वह शख्स के साथ दुबई जाने के लिए कैसे मान गई, जहां दोनों के बीच फिजिकल रिलेशनशिप बने।
बेंच ने कहा, ‘यह सहमति से होता है। हम पुराने जमाने के हो सकते हैं, लेकिन शादी से पहले लड़का और लड़की बिल्कुल अजनबी होते हैं। उन्हें शादी से पहले फिजिकल रिलेशनशिप बनाने में सावधानी बरतनी चाहिए।’
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस नागरत्ना ने कहा, ‘उनके रिश्ते में चाहे जो भी अच्छा-बुरा हो, हम यह नहीं समझ पाते कि वे शादी से पहले फिजिकल रिलेशनशिप कैसे बना सकते हैं… आपको बहुत सावधान रहना चाहिए; शादी से पहले किसी पर भी विश्वास नहीं करना चाहिए।’ इस मामले में शिकायतकर्ता ने दावा किया कि वह शख्स के कहने पर दुबई गई थी, और उसने शादी का झांसा देकर उसके साथ फिजिकल रिलेशन बनाए, और बाद में किसी और से शादी कर ली।
‘ऐसे मामले में ट्रायल और सजा नहीं दी जा सकती’
जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि ऐसे मामले ट्रायल और सजा के लिए सही नहीं हैं। उन्होंने दोनों पार्टियों से सेटलमेंट की संभावना तलाशने को कहा और उनके विचार जानने के लिए मामले की सुनवाई बुधवार तक टाल दी। उन्होंने कहा, ‘अगर वह इस बारे में इतनी सख्त थी तो उसे शादी से पहले नहीं जाना चाहिए था। ये ऐसे मामले नहीं हैं जिनमें ट्रायल किया जाए और सजा दी जाए, जब सहमति से रिश्ता हो।’













