यह रिफाइनरी की कल्पना अरामको, Adnoc और सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के बीच जॉइंट वेंचर के रूप में की गई थी। इसमें अरामको और Adnoc की 50 फीसदी हिस्सेदारी रहनी थी जबकि बाकी 50 फीसदी हिस्सेदारी भारत की तीन कंपनियों के पास रहनी थी। इस प्रोजेक्ट को 2022 में कमीशन हो जाना था लेकिन भूमि अधिग्रहण में देरी के कारण इस पर अभी कोई काम नहीं हुआ है।
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ओएनजीसी की रिफाइनरी
एक अधिकारी ने कहा कि संभवत: Adnoc इस प्रोजेक्ट से निकल चुकी है क्योंकि उसकी दूसरी प्राथमिकताएं हैं। इसी तरह सऊदी अरामको भी पुरानी शर्तों की समीक्षा चाहती है। अरामको इन इस पर कोई टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया। इसी तरह Adnoc, आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल ने भी इस बारे में ईमेल का जवाब नहीं दिया। भारत में पेट्रोकेमिकल्स की डिमांड मजबूत बने रहने की संभावना है।
महाराष्ट्र के रत्नागिरि में 3 लाख करोड़ रुपये के निवेश से सालाना 60 मिलियन टन क्षमता की रिफाइनरी बनाने की योजना थी। इस बीच ओएनजीसी गुजरात में एक लाख करोड़ रुपये के निवेश से सालाना 12 मिलियन टन क्षमता वाली रिफाइनरी लगाने पर विचार कर रही है। यह पहला मौका है जब ओएनजीसी देश में रिफाइनरी लगा रही है।













