इन सीरियल ब्लास्ट में 58 लोगों की जान गई थी। आज इस घटना को 28 साल बीत चुके हैं, लेकिन इसका दर्द आज भी मौजूद है। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने इन सीरियल धमाकों की बरसी पर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया और बताया कि किस तरह वे इन धमाकों में बाल-बाल बचे थे।
इतिहास का काला अध्याय- उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अपनी पोस्ट में कहा कि वो 14 फरवरी 1998 को कोयंबटूर में हुए दुखद सीरियल बम धमाकों में मारे गए बेगुनाह लोगों को दिल से श्रद्धांजलि देते हैं। उन्होंने इस दिन को देश के इतिहास का एक काला और दर्दनाक अध्याय बताया है।
आडवाणी के दौरे के समय हुआ ब्लास्ट
घटना को याद करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि उस मनहूस दिन, जब एलके आडवाणी शहर के दौरे पर थे, कोयंबटूर में एक के बाद एक भयानक धमाके हुए और अनगिनत परिवारों पर गहरे निशान छोड़े। उस समय जो डर, दुख और अनिश्चितता का माहौल था, वह मेरी यादों में गहराई से बसा हुआ है
आतंकवाद के खिलाफ हों एकजुट
उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि जब हम पीड़ितों को बहुत दुख के साथ याद कर रहे हैं, तो मैं उन दुखी परिवारों के साथ खड़ा हूं, जिनके नुकसान की भरपाई कभी नहीं हो सकती। आइए हम आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होने और शांति, भाईचारा और देश की एकता बनाए रखने का अपना वादा फिर से पक्का करें।













