सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश मे कहा है कि फरलो की अवधि खत्म होने के बाद विकास यादव को सरेंडर करना होगा। कोर्ट के फैसले के अनुसार, 7 मार्च शाम 5 बजे से पहले विकास यादव को जेल मे सरेंडर करना होगा।
कोर्ट में क्या-क्या दलीलें दी गईं?
- जस्टिस एम एम सुंदरेश और विपुल एम पंचोली की पीठ ने इस बात पर गौर किया कि विकास 23 साल जेल में बिता चुका है और होली पर उसे अपने परिवार के साथ समय बिताने के लिए 7 मार्च तक के लिए ‘फरलो’ प्रदान की।
- ‘फरलो’ से तात्पर्य जेल से अस्थायी रिहाई है, न कि पूरी सजा का निलंबन या माफी। यह आमतौर पर, लंबी अवधि की जेल की सजा काट रहे उन कैदियों को दी जाती है, जिन्होंने अपनी सजा का एक हिस्सा कारागार में बिता लिया है।
- पीठ ने कहा, ‘याचिकाकर्ता ने होली के दौरान (परिवार के साथ) समय बिताने की इच्छा जाहिर करते हुए ‘फरलो’ का अनुरोध किया है। मामले के गुण-दोष पर विचार किये बिना, हम याचिकाकर्ता को 7 मार्च तक ‘फरलो’ पर रिहा करने की अनुमति देते हैं।’
- सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने ‘फरलो’ दिए जाने के खिलाफ शिकायतकर्ता के वकील की ओर से जताई गई आपत्तियों को खारिज कर दिया।
- पीठ ने कहा, ‘क्या आप उसे फांसी देना चाहते हैं? क्या ऐसा ही है? इस मामले में आपकी बात सुनने का क्या मतलब है? 23 साल बाद भी आप पुरानी घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करना नहीं छोड़ना चाहते…।’
- जस्टिस सुंदरेश ने मौखिक टिप्पणी की कि इस तरह की राहत देने से कभी-कभी दोषी के सुधार में मदद मिल सकती है।
क्या है नीतीश कटारा हत्याकांड?
- फरवरी 2002 में नीतीश कटारा की हत्या हुई थी। यह पूरा मामला ऑनर किलिंग से जुड़ा हुआ था।
- नीतीश कटारा की यूपी के नेता डीपी यादव की बेटी के साथ दोस्ती थी और इसी को लेकर उसका अपहरण कर लिया गया और बाद में हत्या कर दी गई थी।
- इस हत्या का आरोप नीतीश की दोस्त भारती के भाई विकास और विशाल पर लगा। विकास डीपी यादव का बेटा है।
- निचली कोर्ट ने इस हत्याकांड को ऑनर किलिंग माना और 30 मई 2008 को विकास एवं विशाल को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
- ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि कटारा की हत्या इसलिए की गई क्योंकि यादव जोड़ी को भारती के साथ उसका कथित रिश्ता पसंद नहीं था क्योंकि वे अलग-अलग जातियों के थे।
- बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के समय विकास यादव की उम्रकैद की सजा को 25 साल की सजा के रूप में बदल दिया था।
- इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2016 में विकास यादव और विशाल यादव की 25-25 साल की कैद की सजा को बरकरार रखा।














