ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्मकुंडली में कुछ विशिष्ट ग्रह स्थितियां व्यक्ति के भीतर देश के लिए कुछ कर गुजरने का अदम्य उत्साह उत्पन्न करती हैं। सामान्यतः सर्वप्रथम लग्न कुंडली का अध्ययन किया जाता है, किंतु सत्य के अधिक समीप पहुँचने के लिए नवांश सहित अन्य वर्ग कुंडलियों का अध्ययन भी आवश्यक माना गया है। जिस प्रकार जन्मकुंडली का चतुर्थ भाव माता से संबंधित होता है, उसी प्रकार द्वादशांश चक्र को राष्ट्र-चिंतन से जोड़ा
गया है। इसके अतिरिक्त सप्तमांश, द्वादशांश और त्रिशांश चक्रों का विश्लेषण भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिष ग्रंथों में शहीद होने वाले व्यक्तियों से संबंधित अनेक योगों का उल्लेख मिलता है। सामान्यतः जन्मकुंडली में द्वितीय और सप्तम भाव को मारक स्थान माना जाता है, जबकि महर्षि पराशर के अनुसार अष्टम और तृतीय भाव आयु से संबंधित होते हैं। अष्टम भाव से जीवन की अवधि और मृत्यु दोनों का विचार किया जाता है। ग्रहों की
दृष्टि से सूर्य, गुरु, शुक्र और मंगल का विशेष महत्व है, जिनके आधार पर व्यक्ति के भीतर देशप्रेम और समर्पण की भावना का अध्ययन किया जाता है। इन ग्रहों की स्थिति और बल से ही कुंडली में राष्ट्र के प्रति प्रेम और त्याग की प्रवृत्ति स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।
अगर किसी की जन्मकुण्डली में मंगल धनु या मीन राशि में होता है तो ऐसे लोग देश के लिए हर सम्भव कार्य करने वाले होते हैं। कुण्डली में गुरु मेष या वृश्चिक राशि के साथ होता है तो ऐसा व्यक्ति देश प्रेमी होता है। कुण्डली के दसवें भाव में सूर्य अगर अपनी ही राशि यानि सिंह राशि में होता है तो ऐसे लोग देशभक्ति से भरे होते हैं। देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में दशमी तिथि को जन्मे जातक देश व दूसरों के हित के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने हेतु दूसरों की अपेक्षा अधिक तत्पर रहते हैं।














