इस बीच कनाडा सरकार ने इस हफ्ते क्यूबा से लौटने वाले लोगों के लिए हेल्थ स्क्रीनिंग और सात दिनों की क्वारंटाइन की घोषणा कर दी है। वहीं, स्पेन ने दिसंबर में अपने नागरिकों को ‘गंभीर महामारी’ बताकर क्यूबा से दूर रहने से कहा था। कई लोग इस वायरस को ‘द वायरस’ के नाम से संबोधित कर रहे हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि क्यूबा में एक तिहाई से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं। वहीं, ब्रिटिश मेडिकल जर्नल ने इस “बढ़ोतरी” को हाल के दशकों में देश का सबसे गंभीर संकट बताया है। क्यूबा में 17 दिसंबर तक वायरस से 52 मौतें हुई थीं, जिनमें से ज्यादातर बच्चे थे। अभी तक अधिकारियों ने 38 हजार से ज्यादा लोगों के वायरस से संक्रमित होने की आधिकारिक तौर पर सूचना दी है। हालांकि वास्तविक आंकड़ा से इससे काफी ज्यादा है।
क्यूबा में रहस्यमय वायरस का कहर
द सन की रिपोर्ट के मुताबिक क्यूबा के लोगों का आरोप है कि सरकार असली आंकड़ों को छिपा रही है और वास्तविक आंकड़े इससे कई गुना ज्यादा है। वहीं, हवाना के एक जाने-माने मानवाधिकार कार्यकर्ता मैनुअल कुएस्टा मोरुआ ने कहा है कि यह आउटब्रेक करीब पांच महीने पहले माटांज़ास में शुरू हुआ था, जहां अचानक लोगों की मौते होने शुरू हो गई थी। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार ने मरने वालों के जो डेथ सर्टिफिकेट बांटे हैं, उनमें वायरस का कोई जिक्र नहीं किया गया है। उन्होंने द सन को बताया है कि “इन मौतों को कभी भी आधिकारिक तौर पर वायरस से हुई मौतें नहीं माना गया और इसके बजाय उन्हें ‘कुदरती कारणों’ से हुई मौतें बताया गया है।” उन्होंने आरोप लगाया है कि “मटांजास के प्रांतीय अस्पताल में एक नर्स ने, जिसे बाद में नौकरी से निकाल दिया गया और चुप करा दिया गया, उसने असामान्य रूप से ज्यादा मौतों को लेकर सरकार को आगाह करने की कोशिश की थी।”
स्वास्थ्य अधिकारियों ने पिछले साल अक्टूबर के अंत तक देश भर में एक हफ्ते में बुखार से पीड़ित 13 हजार नये मामलों की जानकारी दी थी। जबकि कैमागुए और होल्गुइन जैसे इलाकों में इतने लोगों की मौत हुई है कि कब्रिस्तान भर गए थे। द्वीप पर बीमारी फैलने के तीन महीने बाद, क्यूबा की सरकार ने इस संकट को पहली बार महामारी माना। लेकिन सरकार ने फिर भी नेशनल हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने से इनकार कर दिया। इस बीमारी को एक तरह का “कंबाइंड आर्बोवायरस” कहा गया है, जिसमें लोग एक ही समय में कई वायरस से इन्फेक्टेड हो जाते हैं और इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। डॉक्टरों का मानना है कि इसमें डेंगू, ओरोपौचे और चिकनगुनिया, साथ ही H1N इन्फ्लूएंजा, रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस और कोविड-19 जैसे दूसरे इन्फेक्शियस रेस्पिरेटरी वायरस शामिल हैं। डेंगू से बुखार, तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द या दबाव और रैशेज होते हैं। वहीं ज्यादा गंभीर मामलों में, शॉक, सांस लेने में दिक्कत, गंभीर ब्लीडिंग और अंगों का फेल होना शामिल है।
यूएस सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) ने वायरस को और फैलने से रोकने के लिए तुरंत ध्यान देने की जरूरत होने की बात कही है। उसने कहा है कि अब तक, ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि यह महामारी यूरोप तक पहुंच गई है। क्यूबा में NGO डेमोक्रेटिक स्पेसेज़ के डायरेक्टर माइकल लीमा ने द सन को बताया है कि यह महामारी कोई “अलग-थलग इमरजेंसी” नहीं है, बल्कि क्यूबा में और भी खतरनाक बातों की ओर इशारा करती है जो “सालों से विकसित हो रही हैं”। उन्होंने कहा कि “देश में जरूरी दवाओं का आकाल है।” वहीं, माटांजास के एक क्लिनिक की एक नर्स ने बताया कि “यह कहना झूठ नहीं होगा कि हम मर रहे हैं।”












