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  • गलवान के बाद क्या बदला? बीजेपी-RSS नेताओं से चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी की मुलाकात

    नई दिल्ली: 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद दोनों पड़ोसियों के आपसी रिश्तों में सबसे ज्यादा गिरावट जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों की घुसपैठ की कोशिशों के बाद हुई हिंसक झड़प की वजह से आई थी। इसकी वजह से आपसी संबंधों में इतनी दूरी आ गई, जिसे दोबारा पटरी पर


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    By Azad Hind Desk जनवरी 13, 2026
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    नई दिल्ली: 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद दोनों पड़ोसियों के आपसी रिश्तों में सबसे ज्यादा गिरावट जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों की घुसपैठ की कोशिशों के बाद हुई हिंसक झड़प की वजह से आई थी। इसकी वजह से आपसी संबंधों में इतनी दूरी आ गई, जिसे दोबारा पटरी पर लाने की कोशिशों में करीब पांच साल गुजर गए। ऐसे में सोमवार को जब चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) का एक प्रतिनिधिमंडल बीजेपी नेताओं से मुलाकात के लिए दिल्ली में पार्टी मुख्यालय पहुंचा तो यह बहुत चौंकाने वाला लगा।

    बीजेपी नेताओं से मिले सीपीसी नेता

    केंद्र में 12 साल से सत्ता चला रही बीजेपी के वैचारिक अगुवा संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है। ऐसे समय में चीन की सत्ताधारी चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिनिधिमंडल का दिल्ली में झंडेवालान स्थित आरएसएस के मुख्य कार्यालय में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले से मुलाकात का कार्यक्रम सामान्य नहीं है। इससे पहले सोमवार को सीपीसी के एक 6 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बीजेपी हेडक्वार्टर में पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं से मुलाकात की। इसकी जानकारी बीजेपी महासचिव अरुण सिंह ने तस्वीरों के साथ खुद अपने एक्स हैंडल पर शेयर की।

    बीजेपी-सीपीसी में संवाद बढ़ाने पर विचार

    पार्टी के राज्यसभा सांसद अरुण सिंह ने चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद एक्स पर लिखा, ‘इंटरनेशन डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के वाइस मिनिस्टर सुन हैयान ने बीजेपी मुख्यालय का दौरा किया। बैठक के दौरान हमने बीजेपी और सीपीसी के बीच संवाद और बातचीत कैसे बढ़ाएं, इसपर चर्चा की।’ सीपीसी नेताओं से बैठक के बाद बीजेपी के विदेश मामलों के इंचार्ज डॉ विजय चौथाईवाले ने एक्स पर बताया कि ‘महासचिव अरुण सिंह की अगुवाई में बीजेपी प्रतिनिधिमंडल और सीपीसी डेलिगेशन के बीच इंटर पार्टी कम्युनिकेशन को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल में भारत में चीन के राजदूत शू फेहॉन्ग भी शामिल हुए।’

    सीपीसी से लगभग दोगुने बीजेपी के सदस्य

    चीन के स्टेट काउंसिल इंफॉर्मेशन ऑफिस के मुताबिक जून 2024 के अंत में चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी के कुल 10.27 करोड़ सदस्य थे। वहीं बीजेपी खुद को दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बताती है। पार्टी का दावा है कि पिछले सदस्यता अभियान के बाद 2025 में इसके सदस्यों की संख्या 18 करोड़ से ज्यादा है।

    ‘कोई डील थोड़े ही साइन कर रहे हैं’

    दरअसल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर बीजेपी लगातार चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी से सीक्रेट डील पर हस्ताक्षर करने के आरोप लगाती रही है। यही नहीं, बीजेपी राहुल गांधी पर 2017 में डोकलाम संघर्ष के दौरान दिल्ली में चीनी दूतावास में उसके राजनयिकों से मुलाकात का भी दावा करती है, जिसका कांग्रेस खंडन करती है। ऐसे में चीनी सत्ताधारी दल के नेताओं से बीजेपी और संघ के पदाधिकारियों की बातचीत को लेकर हैरानी स्वभाविक है। आज़ाद हिन्द ऑनलाइन ने एक बीजेपी नेता से इस बारे में पूछा तो उन्होंने नाम गुमनाम रखने की शर्त पर कहा, ‘दुनिया भर के राजनीतिक दलों के साथ इस तरह की आपसी चर्चाएं होती रहती हैं। अभी नेपाल का भी एक प्रतनिधिमंडल आया था। बीजेपी के नेता भी चीन जाते रहे हैं। ये चीनी प्रतिनिधिमंडल संसद भी जाएगा। हमारी मुलाकात तो सार्वजनिक है, कोई डील थोड़े ही साइन कर रहे हैं।’

    पीएम की चीन यात्रा के बाद बदले हालात

    ऐतिहासिक रूप से देखें तो बीजेपी और सीपीसी के नेताओं की इस तरह की मुलाकातों का सिलसिला 2000 के दशक की शुरुआत में ही शुरू हो गया था। बीजेपी का कई प्रतिनिधिमंडल चीन जाकर सीपीसी के नेताओं से मिल चुका है। लेकिन, 2020 में गलवान घाटी में दोनों देशों के जवानों में हुई हिंसक झड़प के बाद इस तरह के संवाद के मायने बढ़ गए हैं। इस संघर्ष के बाद दोनों देशों में जो एक दूरी पैदा हुई थी, उसपर तब से मरहम लगना शुरू हुआ, जब अक्टूबर 2024 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन गए। इसके बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर की बातचीत में भी मजबूती आनी शुरू हुई और विमानों की सीधी आवाजाही का भी रास्ता खुलना शुरू हो गया।

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