सूर्यग्रहण एक खगोलीय घटना है जब सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा आ जाता है। इस संयोजन से सूर्य के कोरोना का हिस्सा छिप जाता है और दिन में अंधेरे जैसा महसूस होने लगता है। इस बार यह सूर्यग्रहण खास होगा क्योंकि पूरी तरह से न ढक पाने के चलते कोरोना का बाहरी हिस्सा दिखाई देगा और सूर्य रिंग ऑफ फायर की तरह नजर आएगा।
‘रिंग ऑफ फायर’ सूर्यग्रहण
17 फरवरी को अमावस्या के दिन जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरेगा, उसी समय वलयाकार सूर्यग्रहण लगेगा। चूंकि, इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी से अपने सबसे दूर के बिंदु के पास होगा, इसलिए यह आसमान में थोड़ा छोटा दिखाई देगा और सूर्य की डिस्क को पूरी तरह ढक नहीं पाएगा। नेशनल जियोग्राफिक की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रहण के चरम पर चंद्रमा सूर्य के 92% हिस्से को कवर करेगा, जिससे रोशनी का एक घेरा आग के छल्ले की तरह दिखाई देगा। रिंग ऑफ फायर का यह दृश्य 2 मिनट 19 सेकंड होगा।
हालांकि, साल के पहले सूर्यग्रहण को देखना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि यह केवल अंटार्कटिका से दिखाई देगा। वहीं, दक्षिण अमेरिकी और दक्षिण अफ्रीका में यह आंशिक रूप से दिखाई देगा।
ग्रहों की परेड
फरवरी के आखिर में हमारे सौर मंडल के ग्रह एक शानदार नजारा पेश करेंगे। 28 फरवरी को रात के आसमान में ग्रहों की परेड दिखाई देगी, जब रात के आसमान में छह ग्रहों को देखा जा सकेगा। सूर्यास्त के बाद शाम के आसमान में छह ग्रह बृहस्पति, यूरेनस, नेपच्यून, बुध, शनि और शुक्र एक लाइन में दिखाई देंगे। प्लैनेटरी परेड का यह नजारा अमेरिका, कनाडा, मेक्सिको, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत में दिखाई देगा। बुध, शुक्र, शनि और बृहस्पति को बिना किसी उपकरण के देखा जा सकता है।वहीं, यूरेनस और नेपच्यून के लिए दूरबीन की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए आसमान का साफ रहना जरूरी होगा।













