फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गुरुवार को कहा है कि आर्कटिक इलाके को लेकर अमेरिका की धमकियों के बाद फ्रांस जल्द ही एक यूरोपीय मिलिट्री एक्सरसाइज में शामिल होने के लिए ग्रीनलैंड में अतिरिक्त जमीनी, हवाई और समुद्री सेना भेजेगा।” फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने नये साल के भाषण के दौरान ट्रंप को एक तरह से चेतावनी देते हुए कहा कि “फ्रांसीसी सैनिकों की एक पहली टीम पहले से ही मौके पर है और आने वाले दिनों में जमीनी, हवाई और समुद्री संसाधनों के साथ उन्हें और मजबूत किया जाएगा।”
ग्रीनलैंड पर अमेरिका से टकराने को तैयार फ्रांस
आपको बता दें की ग्रीनलैंड एक स्वायत्त क्षेत्र है और डेनमार्क इसकी देखरेख करता है। डोनाल्ड ट्रंप ने बार बार कहा है कि अमेरिका, ग्रीनलैंड पर अपना नियंत्रण करेगा और इसके लिए उन्होंने सैन्य इस्तेमाल की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया है। जबकि ग्रीनलैंड ने साफ कर दिया है कि उसे अगर अमेरिका या डेनमार्क के बीच किसी एक को चुनना पड़े, तो वो डेनमार्क होगा। आर्कटिक द्वीप ग्रीनलैंड के उप प्रधान मंत्री म्यूट एगेडे ने बुधवार को कहा है कि “ग्रीनलैंड में और NATO सैनिकों के आने की उम्मीद है।” उन्होंने कहा, “आज से और आने वाले दिनों में ग्रीनलैंड में NATO सैनिकों की मौजूदगी बढ़ने की उम्मीद है। उम्मीद है कि ज्यादा मिलिट्री उड़ानें और जहाज़ होंगे।” उन्होंने आगे कहा कि “ये सेनाएं ट्रेनिंग अभ्यास के लिए वहां होंगी।”
अमेरिका के लिए चेतावनी की बात यूरोपीय देशों का एकजुट होना है। ग्रीनलैंड में होने वाले इस युद्धाभ्यास में फ्रांस के अलावा जर्मनी और नॉर्डिक देशों ने अभी तक अपनी सेना को भेजने की पुष्टि कर दी है। इस युद्धाभ्यास का मकसद ग्रीनलैंड की सुरक्षा को लेकर अमेरिका को संकेत भेजना है। इससे पहले इसी हफ्ते वाइट हाउस में ग्रीनलैंड को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की गई थी, जिसमें अमेरिका के उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस और डेनमार्क, ग्रीनलैंड के उच्चाधिकारी शामिल थे। लेकिन बैठक में मतभेदों को सुलझाया नहीं जा सका। हालांकि पोलैंड ने अपनी सेना को भेजने से मना कर दिया है। लेकिन पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने चेतावनी दी थी कि एक नाटो देश अगर दूसरे देश के इलाके पर हमला करने जैसा कदम उठाता है, “जैसा कि हम जानते हैं, दुनिया का अंत” होगा। उन्होंने इसे एक संभावित राजनीतिक आपदा बताया था।












