ग्रीनलैंड के लिए कुछ भी करने को तैयार अमेरिका
व्हाइट हाउस के इस बयान ने यूरोप में खलबली मचा दी। आनन-फानन में यूरोपीय नेताओं ने डेनमार्क के आह्वान पर ग्रीनलैंड पर बैठक की। इस दौरान उन्होंने ग्रीनलैंड की संप्रभुता और डेनमार्क के उसके स्वायत्त क्षेत्रों पर दावों की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की धमकियों को गंभीरता से ले रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अमेरिका ग्रीनलैंड को पाने के लिए अपने नाटो सहयोगियों की भी परवाह नहीं करेगा। इतना ही नहीं, सवाल यह भी है कि क्या अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकी अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दे रहा है या कुछ और ही उद्देश्य है।
ग्रीनलैंड कितना महत्वपूर्ण है
ग्रीनलैंड रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में वैश्विक संघर्षों के कारण ग्रीनलैंड का महत्व और ज्यादा बढ़ गया है। ग्रीनलैंड हमेशा से यूरोप और उत्तरी अमेरिका को जोड़ने वाला पुल रहा है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ग्रीनलैंड का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। जर्मन यू-बोट्स ने इसे अमेरिका समर्थित मित्र देशों की नौसेना और व्यापारिक जहाजों का कत्लगाह बना दिया था। उस समय ग्रीनलैंड के पास का इलाका मित्र देशों की जमीन से उड़ने वाले लड़ाकू विमानों की रेंज से बाहर था। इस कारण मित्र देश जर्मन यू-बोट्स को निशाना नहीं बना सकते थे।
ग्रीनलैंड पर कब्जा क्यों करना चाहता है अमेरिका
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीनलैंड को जो भी कंट्रोल करेगा, वह महत्वपूर्ण अटलांटिक समुद्री मार्गों पर हावी हो जाएगा। माना जा रहा है कि अमेरिका इसी के लिए ग्रीनलैंड पर कब्जा करना चाहता है। हालांकि, ग्रीनलैंड पर एक अमेरिकी मिलिट्री बेस पहले से ही मौजूद है। यह बेस अमेरिका की अर्ली वॉर्निंग मिसाइल डिटेक्शन सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अमेरिका ग्रीनलैंड के जरिए आर्कटिक को भी कंट्रोल करना चाहता है। वह आर्कटिक में बढ़ रही रूस और चीन की मौजूदगी के काउंटर के तौर पर ग्रीनलैंड को एक बेस के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है।
ग्रीनलैंड में अब भी जो चाहे वह कर सकता है अमेरिका
ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे का विरोध करने वालों का तर्क है कि यह द्वीप पहले से ही एक नाटो सदस्य देश का सेमी-ऑटोनोमस रीजन है। ऐसे में अमेरिका को आसानी से इसके विशाल खाली जगहों पर आसानी से नया सैन्य अड्डा स्थापित करने, हजारों सैनिकों को रखने और हथियारों को तैनात करने की मंजूरी मिल सकती है। डेनमार्क वर्तमान में सिर्फ कुत्तों की स्लेज (बर्फ पर खींचने वाली गाड़ी) के जरिए इसकी रक्षा कर रहा है। ।
ग्रीनलैंड के दुर्लभ खनिजों पर अमेरिका की नजर
ग्रीनलैंड अभी तक इस्तेमाल न किए गए ऑफशोर तेल और गैस क्षेत्रों से भी समृद्ध है। जैसे-जैसे वैश्विक तापमान बढ़ने से यहां की बर्फ पिघलेगी, अमेरिका की ग्रीनलैंड के दुर्लभ खनिजों तक पहुंच बढ़ती जाएगी। इसकी मदद से अमेरिका अधिक उन्नत हथियारों को निर्माण कर सकता है। माना जा रहा है कि ट्रंप के ग्रीनलैंड पर कब्जे की एक बड़ी वजह यह भी है। हालांकि, डेनमार्क ने कहा है कि अगर अमेरिका को ग्रीनलैंड के दुर्लभ खनिजों में रुचि है तो वह साझेदारी समझौतों के लिए तैयार है।














